WEBVTT

00:04.422 --> 00:06.298
हाउस ऑफ़ डेविड में अब तक…

00:06.382 --> 00:09.218
कई हफ़्ते बीत गए।
मुझे लगा आप लोग नहीं आएँगे।

00:09.301 --> 00:10.928
साथ मिलकर, हम बदला ले सकते हैं।

00:11.011 --> 00:13.305
एक ही शर्त पर। तुम्हारे तख़्त के बदले।

00:13.389 --> 00:15.099
हम साथ एक आज़ाद ज़िंदगी गुज़ारेंगे।

00:15.182 --> 00:17.143
अपनी किस्मत के फ़ैसले मैं नहीं कर सकती।

00:17.226 --> 00:19.270
-कहीं जा रहे हो?
-मेरा यहाँ कोई काम नहीं है।

00:19.353 --> 00:21.439
सॉल वंश ने सलाम भेजा है।

00:21.522 --> 00:22.523
गोलायथ!

00:25.609 --> 00:27.820
मुझे उनके राजा से लड़ने दो।

00:27.903 --> 00:29.447
फिलिस्तीनी इकट्ठे हो गए हैं।

00:29.530 --> 00:31.073
हम वही करेंगे जो हमेशा करते हैं।

00:31.574 --> 00:32.450
लड़ेंगे।

00:34.952 --> 00:40.916
सुनो, ऐ इज़राइल के लोगों

00:42.042 --> 00:49.049
बस वही है हमारा परमेश्वर

00:51.844 --> 00:58.809
वह परमेश्वर

00:58.893 --> 01:02.646
जो है एक

01:19.330 --> 01:20.915
पिताजी, मान जाइए।

01:20.998 --> 01:24.084
नेथानील, तुम्हें तो पता है
महाराज ने हर लायक इंसान को बुलाया है।

01:24.168 --> 01:25.336
मैं लायक नहीं हूँ।

01:25.419 --> 01:26.295
मैं योद्धा नहीं हूँ।

01:26.378 --> 01:27.838
पिताजी, मैं पहले ही मारा जाऊँगा।

01:27.922 --> 01:29.340
तुम्हारे भाई तुम्हारी हिफाज़त करेंगे।

01:29.423 --> 01:30.299
बात क्या है?

01:30.508 --> 01:32.009
पिताजी हम सभी को जंग में भेज रहे हैं।

01:32.092 --> 01:33.511
जंग में? कैसी जंग?

01:33.594 --> 01:34.470
फिलिस्तीनियों के साथ।

01:34.553 --> 01:35.888
उन्होंने हमला कर दिया है।

01:35.971 --> 01:37.765
पिताजी, यह पागलपन है। मैं नहीं जाऊँगा।

01:37.848 --> 01:40.184
-मैं इसकी जगह जाऊँगा। मुझे भेजिए।
-मेरी जगह यह जाएगा।

01:40.267 --> 01:41.435
-इसे भेजिए।
-यह नहीं जाएगा।

01:42.019 --> 01:43.521
क्यों नहीं? हर नौजवान को जाना है।

01:43.604 --> 01:45.606
-यह अभी बच्चा है।
-मैं भी तो बच्चा हूँ।

01:45.689 --> 01:47.107
अगर जंग हो रही है, तो मैं लड़ूँगा।

01:47.191 --> 01:50.319
तुम मेरी बात मानोगे। महाराज के पास जाओ।
डेविड को मेरे साथ रहना होगा।

01:50.402 --> 01:51.445
-नेथानील, चलो।
-नहीं।

01:51.529 --> 01:53.322
अपने हाथ दूर हटाओ।

01:53.405 --> 01:54.865
पिताजी।

01:55.574 --> 01:59.119
पिताजी, जो राजा आपको पसंद नहीं
उसके लिए मुझे मौत के मुंह में डाल रहे हैं।

01:59.745 --> 02:01.789
नेथानील, इधर आओ।

02:01.872 --> 02:03.749
तुम्हें अपने भाइयों के साथ रहकर लड़ना है।

02:04.542 --> 02:06.335
ईश्वर और इज़राइल के लिए।

02:07.253 --> 02:08.504
-समझे?
-समझ गया।

02:10.923 --> 02:12.132
अब जाओ।

02:14.552 --> 02:16.804
बहुत हुआ, भाई।
खुद की कितनी बेइज़्ज़ती करवाओगे।

02:23.561 --> 02:24.395
मगर क्यों?

02:24.478 --> 02:25.437
कोई सवाल नहीं।

02:25.521 --> 02:27.481
-मुझे जवाब दीजिए।
-आज नहीं, डेविड।

02:27.565 --> 02:30.693
-पहले सभी औलादों को जंग में भेज चुका हूँ।
-मैं भी तो आपकी ही औलाद हूँ।

02:30.776 --> 02:32.069
मेरा वह मतलब नहीं था।

02:32.945 --> 02:33.779
मुझे हक़ है…

02:33.863 --> 02:37.783
क्या लगता है
तुम्हें किस बात का हक़ है, डेविड?

02:37.867 --> 02:39.368
किस बात का हक़ है?

02:39.994 --> 02:41.078
सच्चाई जानने का।

02:42.246 --> 02:43.622
बस, एक बार।

02:44.456 --> 02:47.293
मुझे जानने का हक़ है
कि आप मुझे इन पहाड़ियों में क्यों रखते हैं।

02:47.376 --> 02:49.169
और मैंने तुम्हें कई बार बताया है।

02:49.795 --> 02:51.171
मन की गहराइयों में झांको।

02:51.755 --> 02:52.590
आप ही कहते हैं न?

02:52.715 --> 02:54.550
मन की गहराइयों में झांको।

02:54.633 --> 02:59.555
मेरे दिल को लगता है
कि आपने मुझसे कभी सच नहीं कहा।

02:59.889 --> 03:00.723
नहीं।

03:01.223 --> 03:02.057
रहने दीजिए।

03:02.641 --> 03:03.517
अब बता दीजिए।

03:05.728 --> 03:07.897
-भेड़ों को जाकर देखो, डेविड।
-नहीं।

03:23.120 --> 03:24.663
मुझे जाने दीजिए।

03:36.383 --> 03:43.140
हाउस ऑफ़ डेविड

03:43.807 --> 03:50.064
एलाह का दर्रा - फिलिस्तीन का युद्ध

04:17.216 --> 04:19.009
वह दिन जिसका मैंने सपना देखता था।

04:19.468 --> 04:20.886
कैसा सपना?

04:20.970 --> 04:22.596
हमारी सेनाओं के एक साथ आने का।

04:23.847 --> 04:25.140
देखा जाएगा।

04:44.743 --> 04:47.997
एलाह का दर्रा
इज़राइली खेमा

04:48.080 --> 04:49.623
तीस साल।

04:50.749 --> 04:56.797
तीस साल से मैंने इन लोगों की सेवा की है,
उनका नेतृत्व किया है, उनके लिए लड़ा हूँ।

04:57.631 --> 04:58.799
अब मैं थकने लगा हूँ।

05:00.259 --> 05:01.885
आप क्या सोच रहे हैं, सॉल?

05:04.054 --> 05:05.806
मैं आगे की सोच रहा हूँ।

05:08.976 --> 05:10.185
आप शिकायत कर रहे हैं।

05:11.103 --> 05:12.646
क्या मुझे इसका हक़ नहीं?

05:12.730 --> 05:14.023
नहीं, बिल्कुल है।

05:14.106 --> 05:15.149
पूरी तरह।

05:17.484 --> 05:21.530
मेरी गुज़ारिश है कि दुश्मनों की सेना के
पहुँचने से पहले कर लीजिए।

05:22.072 --> 05:24.116
इस बार उनकी तादाद बहुत है।

05:25.451 --> 05:29.204
वो दिन कहाँ गए जब जंग से पहले
तुम मेरा हौसला बढ़ाया करते थे?

05:35.878 --> 05:38.130
शायद मैं भी थकने लगा हूँ।

05:46.555 --> 05:47.723
सेनापति आबनर, मुझे बताओ।

05:48.474 --> 05:49.725
मुझे बताओ कि मैं कौन हूँ।

05:52.394 --> 05:53.812
आप विजयी महाराज सॉल हैं।

05:55.481 --> 05:59.485
इज़राइल में शाही दौर लाने वाले पहले महाराज,
जिसने कबीलों को एकजुट किया।

06:01.403 --> 06:02.404
नहीं।

06:03.113 --> 06:04.490
मुझे बताओ कि मैं कौन हूँ…

06:07.367 --> 06:08.243
तुम्हारे नज़रों में।

06:09.620 --> 06:15.292
महाराज, आप हमारे लोगों को डर से निकालकर
निश्चितता की तरफ लाये।

06:17.127 --> 06:19.421
भले कितनी ही मुश्किलें आईं,
आप कभी नहीं डगमगाए।

06:20.005 --> 06:22.758
आपने मुझे उस ज़िंदगी से निकाला
जिससे मैं खुद नहीं निकल सकता था।

06:24.343 --> 06:25.761
आपने मुझे एक मकसद दिया।

06:26.512 --> 06:29.932
और इस एहसान के बदले में अगर जान भी
देनी पड़ी तो मैं ख़ुशी-ख़ुशी दे दूँगा।

06:30.516 --> 06:32.476
मेरी नज़रों में आपका यह कद है, महाराज।

06:44.822 --> 06:47.199
और मुझे महाराज क्यों चुना गया?

06:50.702 --> 06:52.162
इस पल के लिए ही।

06:58.168 --> 06:59.253
मैंने सही कहा?

07:00.379 --> 07:01.296
हाँ, काम चल जाएगा।

07:04.174 --> 07:06.552
मुझे ख़ुशी है
कि तुम मेरे साथ हो, मेरे पुराने दोस्त।

07:07.553 --> 07:09.012
हमेशा रहूँगा, महाराज।

07:15.727 --> 07:18.897
अब तक तो
150,000 से ज़्यादा फिलिस्तीनी लग रहे हैं।

07:19.898 --> 07:21.275
दिन ढलने तक और आएँगे।

07:24.570 --> 07:26.446
हमारे एक के मुकाबले तीन फिलिस्तीनी हैं।

07:28.615 --> 07:30.450
यह सही नहीं है, है न?

07:30.534 --> 07:32.035
हमने सही की मांग की भी नहीं।

07:32.411 --> 07:34.872
हम अपने एक लड़ाके के बदले उनके दस मारेंगे।

07:35.247 --> 07:38.375
और मुझे, ऐसा करने में, बेहद ख़ुशी होगी।

07:41.628 --> 07:42.629
अरे, नहीं।

07:42.713 --> 07:43.672
उठ जाओ।

07:48.385 --> 07:49.678
यह एक बेहतरीन तलवार है।

07:49.761 --> 07:50.762
मैं देख सकता हूँ?

07:55.017 --> 07:59.354
मेरे पिता ने 20 साल पहले
इसे एक फ़िलिस्तीनी से छीना था।

08:00.147 --> 08:01.982
आपके पिता के साथ शुरूआती जंगों में लड़कर।

08:02.065 --> 08:03.108
हाँ, मुझे याद है।

08:03.817 --> 08:04.902
तुम्हारा नाम क्या है?

08:05.319 --> 08:08.113
एलिएज़र, ऐशर का बेटा, मेरे कबीले का नाम…

08:08.197 --> 08:09.198
सिमोन है।

08:10.991 --> 08:11.992
जी।

08:14.870 --> 08:16.205
सीधी और धारदार।

08:17.706 --> 08:19.708
ऐशर घराने ने हमेशा हमारा साथ दिया है।

08:21.710 --> 08:23.420
ख़ुशी है कि हम साथ मिलकर लड़ेंगे।

08:29.968 --> 08:31.553
एलिएज़र?

08:32.846 --> 08:34.306
हमें किस बात का डर?

08:35.224 --> 08:36.391
परमेश्वर हमारे साथ है।

08:49.112 --> 08:50.280
क्या सैमुअल आएँगे?

08:51.531 --> 08:53.867
हमेशा की तरह जंग में दुआ करने के लिए?

08:58.080 --> 08:59.164
बेशक, परमेश्वर ने चाहा तो।

09:04.753 --> 09:06.964
आपने अभी उस बच्चे को एक झूठी उम्मीद दी?

09:07.631 --> 09:09.299
कोई उम्मीद न होने से तो बेहतर है।

09:18.141 --> 09:19.768
हिम्मत रखो, भाइयों।

09:19.851 --> 09:21.144
हिम्मत रखो।

09:22.479 --> 09:24.231
हमारे खिलाफ़ कौन टिक सकता है?

09:24.898 --> 09:25.857
कौन?

09:37.160 --> 09:40.289
महाराज, हमेशा की तरह हम साथ लड़ने आए हैं।

09:40.872 --> 09:45.085
मैं और
मेरे साथ जूडाह कबीला के 25,000 जवान।

09:52.050 --> 09:54.094
मगर मैं वो सब भूला नहीं हूँ, महाराज…

09:55.887 --> 09:59.725
मगर आज, हम एक होकर लड़ेंगे।

10:06.148 --> 10:07.441
हम एक होकर लड़ेंगे।

10:09.526 --> 10:10.652
एक होकर।

10:17.784 --> 10:21.413
भाइयों… महाराज की जय-जयकार करो।

10:56.531 --> 10:59.368
हे परमेश्वर, हम तेरी मेहरबानियों के लिए
शुक्रगुज़ार हैं।

11:00.702 --> 11:05.832
आपने हमें यह घर दिया, खाना दिया,
एक परिवार दिया।

11:05.916 --> 11:09.044
हर वो चीज़ जो आपने हमें दी है,
उसके लिए आपका शुक्रिया।

11:09.961 --> 11:11.380
हमारे दिलों में हमदर्दी दो,

11:12.089 --> 11:14.508
ताकि हम जो कुछ भी करें
बस तेरी रज़ामंदी के लिए करें…

11:15.592 --> 11:19.513
और जितने दिन भी जिएं तुझी पर यकीन रखें।

11:20.347 --> 11:21.431
आमीन।

11:21.598 --> 11:24.142
और ऐ परमेश्वर, हम तेरे बंदे हैं।

11:25.477 --> 11:28.438
हमारी रहनुमाई कर, हमें ताक़त दे,

11:29.398 --> 11:31.983
और हमेशा हमारा साथ दे।

11:32.859 --> 11:33.819
आमीन।

11:33.902 --> 11:34.736
आमीन।

12:06.685 --> 12:07.519
सैमुअल।

12:07.602 --> 12:08.728
कैसे हो, डेविड।

12:12.816 --> 12:14.276
मुझे लगा आप जंग में होंगे।

12:14.776 --> 12:16.611
तुम्हें लेकर मुझे भी यही लगा था, समझे?

12:17.195 --> 12:18.697
और फिर भी हम यहाँ मिल रहे हैं।

12:19.281 --> 12:20.866
एक नए दिन की शुरुआत में।

12:23.452 --> 12:24.661
मुझे अपने पिता के पास ले चलो।

12:25.871 --> 12:28.123
ठीक है। वह घर में ही हैं।

12:29.916 --> 12:31.418
आपको देखकर ख़ुशी हुई।

12:31.501 --> 12:33.879
तुम्हें भी देखकर मुझे बेहद ख़ुशी हुई।

12:35.213 --> 12:37.883
जब मेरी ज़िम्मेदारी तुम ले लोगे,
तब तुम्हें देखना और अच्छा लगेगा।

12:38.592 --> 12:41.386
माफ़ कीजिए, मेरे नबी।

12:42.304 --> 12:44.347
मेरे पास देने को ज़्यादा कुछ नहीं है।

12:44.723 --> 12:48.226
मेरे पास जो कुछ भी बेहतर था
मैंने महाराज की सेना के लिए भेज दिया।

12:49.853 --> 12:50.687
सच में?

12:54.357 --> 12:58.028
पेड़ के इस फल में इतनी बरकत दे
कि हम इसे खाकर

12:58.111 --> 13:01.907
आपकी इबादत के लिए अपने अंदर ताक़त पा सकें।

13:06.870 --> 13:08.163
जैतून के पेड़।

13:10.165 --> 13:12.459
सर्दियों में,
इसकी टहनियाँ हमें गर्मी देती हैं,

13:12.542 --> 13:16.755
और गर्मियों में, छाया देती हैं,
और इससे हम जैतून का तेल निकालते हैं,

13:16.838 --> 13:18.798
जिसकी हमारी ज़िंदगी में अनगिनत फायदे हैं।

13:19.382 --> 13:21.510
देखो तो, हर चीज़ का एक मकसद है।

13:25.388 --> 13:26.806
-सैमुअल…
-डेविड।

13:32.395 --> 13:33.230
मुझे जंग में जाना है।

13:34.564 --> 13:35.482
पिताजी से कहा…

13:35.565 --> 13:40.820
तुम्हें पता है मेरे घर यानी नॉब की चोटी पर
एक जैतून का पेड़ है,

13:40.904 --> 13:43.198
कहते हैं कि वह 1,000 साल पुराना पेड़ है।

13:43.281 --> 13:46.201
मुझे लगता है कि जब जॉशुआ
पवित्र भूमि की तरफ जा रहे थे

13:46.284 --> 13:48.995
तो उन्होंने उस पेड़ के नीचे आराम किया था।

13:49.788 --> 13:52.415
पता है, मेरी पत्नी, हीला

13:52.499 --> 13:56.294
वह जैतून का तेल अपने बालों में लगाती है।

13:56.962 --> 14:00.465
और एक बात बताऊँ?
उसने मुझे भी लगाना सिखा दिया।

14:02.092 --> 14:03.802
क्या लगता है? उससे कुछ फ़ायदा है?

14:07.931 --> 14:13.520
प्यारे नबी, क्या मैं जान सकता हूँ,
आप यहाँ क्यों आए हैं?

14:17.649 --> 14:20.193
ओबेड के बेटे, मुझे ख़ुशी कि तुमने यह पूछा।

14:20.902 --> 14:24.489
पिछली बार तुमसे मिलकर जो कहा था
अपनी वही बात पूरी करने आया हूँ।

14:24.573 --> 14:25.907
मैं कुर्बानी करने आया हूँ।

14:26.658 --> 14:28.785
इस घर से हुई गलतियों की माफ़ी दिलाने।

14:30.036 --> 14:31.454
उनसे छुटकारा दिलाने को।

15:25.133 --> 15:26.468
गाथ का राजा अकीश अगुआई करेगा।

15:29.471 --> 15:30.764
वह गुस्से में लग रहा है।

15:32.474 --> 15:35.185
आपने जंग के मैदान में
उसके पिता की जो हालत की थी,

15:35.435 --> 15:36.853
उसके लिए जायज़ है। मैं भी यही करता।

15:37.937 --> 15:41.358
तुम रणनीति के साथ अगुआई करते,
न कि जज़्बातों के साथ।

15:45.111 --> 15:46.571
ऐशकेलॉन साथ दे रहा है।

15:52.994 --> 15:54.537
ऐशडॉड और युर्ज़ा भी।

15:59.709 --> 16:01.586
अपने झंडे भी नहीं लगाए हैं।

16:02.170 --> 16:03.338
डरपोक कहीं के।

16:07.467 --> 16:08.593
एक्रोन वाले कहाँ हैं?

16:08.760 --> 16:11.054
लगता है वह पांचों कबीलों को
साथ नहीं ला पाया।

16:11.888 --> 16:13.223
यह एक अच्छी निशानी है।

16:36.830 --> 16:37.956
वो कितने होंगे?

16:38.039 --> 16:39.916
तकरीबन 200,000 से ज़्यादा।

16:39.999 --> 16:42.585
इतने घोड़े और रथ हैं
कि हम गिन भी नहीं सकते।

16:42.669 --> 16:44.254
इस सब से हमारी हिम्मत कम नहीं होगी।

16:50.802 --> 16:53.388
हमारी सेना इतनी बड़ी है
तो हमें ही हमला करना चाहिए।

16:53.471 --> 16:56.766
हिब्रू लोगों से लड़ने में
कबसे बड़ी तादाद मायने रखने लगी?

16:56.850 --> 16:58.893
पहले हमें उनकी हिम्मत तोड़नी होगी।

17:49.068 --> 17:50.528
ओह, स्वर्ग के देवता।

17:51.571 --> 17:53.198
यह पृथ्वी का देवता है।

18:05.627 --> 18:07.796
तुम्हारा राजा कहाँ है?

18:08.588 --> 18:12.425
उसे मुझसे लड़ने भेजो,
ताकि मैं उसे मौत दे सकूँ,

18:12.509 --> 18:15.512
और उसे तुम लोगों को गिद्धों को खिला सकूँ।

18:16.763 --> 18:18.306
वह बस एक इंसान है, पिताजी।

18:18.389 --> 18:21.226
और उसका खून बहकर
इस सरज़मीन को अपना बनाऊंगा।

18:24.687 --> 18:25.522
सच में?

18:25.605 --> 18:27.273
मेरे पास अपने राजा को भेजो,

18:28.024 --> 18:31.736
यह किसी ऐसे को जो उससे ताक़तवर हो,
अगर पूरे इज़राइल में कोई ऐसा हो।

18:32.695 --> 18:34.405
मैं अपने देवताओं को याद करूँगा।

18:34.489 --> 18:36.449
अपने सूरमा के लिए अपने खुदा से दुआ माँगो,

18:36.533 --> 18:40.703
ताकि हम में से एक का खून
हमारे लोगों की किस्मत तय करेगी,

18:40.787 --> 18:42.956
और फिर हम देखेंगे कि कौन ताक़तवर है।

18:43.665 --> 18:47.252
और हारने वाला ज़िंदगी भर जीतने वाले की
गुलामी करेगा।

18:48.169 --> 18:54.884
आज यहाँ खड़े होकर,
मैं इज़राइल को चुनौती देता हूँ।

18:56.469 --> 18:58.346
मैं तुम्हारे ईश्वर को चुनौती देता हूँ।

18:59.013 --> 19:00.890
मुझसे लड़ने अपना सूरमा भेजो।

19:39.429 --> 19:40.763
पिताजी, होश में आइए।

19:54.861 --> 19:57.155
नहीं। इसे मुझसे हटाओ।

20:17.133 --> 20:18.009
नहीं।

20:18.092 --> 20:19.177
पिताजी।

20:20.803 --> 20:22.138
तुम्हें श्राप देता हूँ, दैत्य।

20:23.014 --> 20:24.098
मुझसे दूर हो जाओ।

20:24.182 --> 20:26.017
आपको उठना होगा।
पिताजी, अपनी सेना का सोचिए।

20:27.810 --> 20:29.103
इन्हें इनके खेमे में ले जाओ।

20:29.187 --> 20:31.439
हम अंधकार और डर में मरेंगे।

20:31.522 --> 20:32.565
जल्दी करो।

20:32.649 --> 20:33.775
मुझसे दूर हो जाओ।

20:34.567 --> 20:35.735
मुझसे दूर हो जाओ।

20:35.818 --> 20:38.488
किसी ऐसे को ढूँढ़ो
जो उससे लड़ने को तैयार हो।

20:38.571 --> 20:44.410
मैं उससे अपनी बेटी की शादी कर दूँगा।
उसके सारे कर माफ़ कर दूँगा! जो चाहे दूँगा!

20:48.623 --> 20:50.500
जाओ ढूँढ़ो!

20:53.795 --> 20:57.632
मेरा इल्म बरसे बारिश की तरह

20:57.715 --> 21:01.344
मेरी आवाज़ हो शबनम की तरह

21:02.845 --> 21:07.225
जैसे गिरती हैं बारिश की बूँदें
मुलायम घासों पर

21:07.308 --> 21:11.396
और होती है बारिश जड़ी-बूटियों पर

21:12.355 --> 21:17.568
और सुने ये सारा जहाँ

21:17.652 --> 21:24.075
वो बातें जो मैं कहूँ, एक ख़ुदा

21:33.626 --> 21:36.295
सैमुअल, हम किसलिए रुके हैं?

21:38.006 --> 21:39.465
एक जंग हो रही है।

21:40.633 --> 21:43.469
मुझे जाना चाहिए। मैं तैयार हूँ।

21:46.806 --> 21:49.684
तुम्हारी माँ ने
तुम्हें यह बजाना सिखाया, है न?

21:51.394 --> 21:52.520
तुम्हें उसकी याद आती है?

21:54.105 --> 21:57.150
मुझे लगता है तुम्हारी माँ बहुत नेक थीं।

21:58.067 --> 22:02.238
इस दुनिया में माँ से ज़्यादा ताक़तवर
बस कुछ ही चीज़ें हैं।

22:04.365 --> 22:05.408
मेरी अपनी माँ,

22:06.034 --> 22:10.204
मंदिर में इतना लीन होकर पूजा करती थीं

22:10.288 --> 22:12.415
कि पादरियों को लगता कि वह नशे में है।

22:13.166 --> 22:16.919
मगर नहीं, वह पाक काम में खोई होतीं,
यकीन की गहराइयों में।

22:17.462 --> 22:20.256
और वही वजह है कि आज मैं यहाँ हूँ।

22:21.382 --> 22:27.055
एक माँ का ओहदा,
राजा के ओहदे से कहीं बढ़कर होता है,

22:27.138 --> 22:28.931
हज़ारों राजाओं से बढ़कर।

22:30.391 --> 22:32.894
बेहद प्यारा है।

22:35.980 --> 22:40.068
जब मैं पैदा हुआ…
तब उन्होंने मेरे लिए इसे सिला,

22:40.151 --> 22:47.116
और फिर उन्होंने मुझे यह ओढ़ाया,
जब मुझे पादरियों के बीच रहने भेजा गया।

22:47.200 --> 22:48.576
तब मैं दो साल का था।

22:50.661 --> 22:52.830
उनकी याद में मैं इसे पहनता हूँ।

22:53.706 --> 22:55.124
मुझे लगता है यह पुराना हो गया है।

23:00.338 --> 23:02.632
तुम… सही कह रहे हो।

23:05.760 --> 23:07.053
मैं तुम्हें कुछ बताऊँ?

23:08.596 --> 23:09.680
जो चाहो।

23:10.473 --> 23:11.974
मुझे चीज़ें दिखाई देती हैं।

23:14.435 --> 23:19.607
और ज़्यादा सपने, दृश्य,
मगर वो असली जैसे लगते हैं।

23:22.068 --> 23:24.487
जैसे कि…

23:24.570 --> 23:27.573
जैसे तुम किसी अलग दुनिया में होते हो?

23:29.450 --> 23:30.493
हाँ।

23:35.248 --> 23:36.999
ऐसी जगह जहाँ मैं कभी नहीं गया…

23:39.127 --> 23:40.628
मगर वह घर जैसा लगता है।

23:42.380 --> 23:45.591
एक अजीब सी शांति मिलती है।

23:45.675 --> 23:46.592
मुझे बताओ।

23:47.635 --> 23:51.222
मुझे वादियों में
एक नदी बहती दिखाई देती है।

23:52.807 --> 23:58.396
बेहद ख़ूबसूरत पहाड़…
मैंने ऐसा कुछ पहले कभी नहीं देखा।

24:00.148 --> 24:04.485
और वहाँ एक योद्धा होता है…
जिसकी तलवार पानी में होती है।

24:05.653 --> 24:07.071
वह जगह कौन सी है।

24:07.780 --> 24:09.574
नदी की हिफाज़त करना।

24:10.283 --> 24:11.576
मैं इस बारे में जानता हूँ।

24:11.659 --> 24:12.660
यह लिखा हुआ है।

24:14.704 --> 24:16.080
वह जॉशुआ है।

24:17.707 --> 24:18.833
हाँ।

24:19.292 --> 24:23.004
जेरिको में, महान जंग से एक रात पहले,

24:23.504 --> 24:28.759
जॉशुआ ने एक हस्ती को देखा था,
एक योद्धा जिसकी तलवार पानी में थी।

24:29.844 --> 24:30.678
वह कौन है?

24:34.557 --> 24:37.101
और जॉशुआ ने योद्धा से पूछा…

24:38.561 --> 24:40.646
"तुम हमारा साथ देने आए हो

24:41.814 --> 24:44.275
"या फिर दुश्मनों की तरफ से हो?"

24:44.400 --> 24:49.697
और योद्धा ने जवाब दिया,
"किसी की तरफ से नहीं।"

24:50.990 --> 24:55.995
"परमपिता परमेश्वर की सेनाओं का
सेनापति बनकर, मैं आया हूँ।"

24:56.746 --> 25:02.126
पता है, इंसान क्या भूल जाते है,
वो पूछते हैं, "क्या ईश्वर हमारे साथ है?"

25:02.210 --> 25:03.461
"क्या परमेश्वर हमारा साथ देगा?"

25:03.544 --> 25:06.839
मगर बजाए इसके उन्हें यह पूछना चाहिए…

25:08.257 --> 25:10.760
"क्या हम उस परमेश्वर के साथ हैं?"

25:12.303 --> 25:14.096
और फिर जॉशुआ ने उससे पूछा,

25:14.889 --> 25:18.392
"परमेश्वर का अपने बंदे के लिए
क्या हुक्म है?"

25:18.476 --> 25:20.728
और यही वह सवाल है जो पूछना सही है।

25:21.938 --> 25:27.318
और उस योद्धा ने जवाब दिया,
"अपने पैरों से जूते निकालो…

25:29.320 --> 25:31.989
"क्योंकि तुम पाक सरज़मीन पर खड़े हो।"

25:32.990 --> 25:39.205
और जॉशुआ ने ऐसा ही किया
और सजदे में गिर गए और इबादत करने लगे,

25:40.122 --> 25:41.082
और…

25:42.959 --> 25:47.546
शायद यही वह वजह थी जिसके चलते
जेरिको की दीवार उनके सामने ढह गई।

25:55.513 --> 25:58.933
मगर यह सब मुझे क्यों दिखाई देता है?

25:59.642 --> 26:05.898
क्योंकि तुम्हें अभी इस दुनिया के खेल में
अपना किरदार निभाना है।

26:06.899 --> 26:08.526
इन वादियों में कैद रहकर?

26:08.609 --> 26:11.612
डेविड, तुम ऐसे बोल रहे हो
जैसे बीता कल आज हो।

26:12.238 --> 26:15.032
जैसे कि दोनों एक ही हैं।

26:15.616 --> 26:16.659
सुनो।

26:16.867 --> 26:22.164
परमेश्वर के बनाए इस संसार में
हर एक चीज़ एक मकसद के लिए है और…

26:23.708 --> 26:25.501
उसका एक तयशुदा दौर है और वक़्त है।

26:26.168 --> 26:28.170
तो फिर मेरा वक़्त कब आएगा।

26:28.254 --> 26:29.839
तुम बहुत सवाल पूछते हो।

26:29.922 --> 26:33.551
अगर बुरा न लगे तो मुझे एक और गीत सुनाओ।

26:33.634 --> 26:34.593
ठीक है।

26:35.261 --> 26:36.095
सुनाता हूँ।

26:53.446 --> 26:56.574
मैं आज भी तुम लोगों के सामने
वही चुनौती लेकर आया हूँ

26:59.994 --> 27:01.203
अपना सूरमा चुनकर लाओ।

27:01.287 --> 27:02.663
उसे मेरा सामना करने भेजो।

27:03.122 --> 27:07.668
और अगर उसने मुझे हरा दिया,
तो हम तुम्हारे गुलाम बन जाएंगे।

27:08.502 --> 27:14.842
पर अगर वह मेरे हाथों मारा गया,
तो तुम सब हमारे गुलाम होगे!

27:18.054 --> 27:19.347
समझ गए?

27:24.685 --> 27:26.479
मैं कल फिर यहाँ लौटूँगा।

27:33.444 --> 27:36.364
और कितने दिन यूँ ही गुज़रेंगे?

27:36.739 --> 27:39.742
क्या इज़राइल में कोई जांबाज़ नहीं है?

27:39.825 --> 27:45.664
बस दिन बीते जा रहे हैं, एक बार फिर सुन लो,
मैं इज़राइल को चुनौती देता हूँ।

27:49.335 --> 27:50.503
वो नगाड़े क्यों बजा रहे हैं?

27:51.420 --> 27:52.880
मेरा सिर दुखता है।

27:53.381 --> 27:54.507
इसीलिए।

27:55.007 --> 28:00.554
नौ दिन गुज़र गए
और कोई मेरा सामना करने को नहीं आया।

28:01.097 --> 28:03.933
क्या तुम अपने परमेश्वर के सेवक नहीं हो?

28:04.016 --> 28:05.518
आओ और मुझसे लड़ो।

28:12.525 --> 28:14.610
मुझे अपना बदला लेना है।

28:17.029 --> 28:18.114
महारानी।

28:18.697 --> 28:20.116
जंग के मैदान से खबर आई है।

28:21.659 --> 28:22.701
क्या है? क्या लिखा है?

28:23.411 --> 28:24.578
सेनापति आबनर ने खबर भेजी है।

28:27.665 --> 28:30.376
फ़िलिस्तीनियों ने अपनी सेनाओं को
हमारे खिलाफ़ एकजुट कर लिया है,

28:30.709 --> 28:32.336
उनकी तादाद करीब 250,000 है।

28:32.420 --> 28:33.254
क्या कहा?

28:34.630 --> 28:35.881
और उनके बीच एक दैत्य भी है।

28:36.006 --> 28:37.216
एक दैत्य?

28:37.550 --> 28:38.509
कैसे?

28:38.592 --> 28:39.635
माँ?

28:56.235 --> 28:57.778
इसमें और क्या लिखा है?

29:12.418 --> 29:15.379
पिताजी को फिर से दौरे पड़ने लगे हैं।

29:17.214 --> 29:18.799
पहले से भी बदतर।

29:19.800 --> 29:20.968
हमें क्या करना चाहिए?

29:30.436 --> 29:32.188
अब कुछ करने को नहीं बचा।

29:34.773 --> 29:37.193
हमेशा कोई न कोई रास्ता ज़रूर होता है।

29:37.443 --> 29:39.195
कम से कम, हम दुआ मांग सकते हैं।

29:40.279 --> 29:41.489
किस से?

29:43.032 --> 29:44.617
आप जानती हैं किस से।

29:45.201 --> 29:46.994
मैं किसी के सामने नहीं गिड़गिड़ाने वाली।

29:49.538 --> 29:53.542
माँ, परमेश्वर ने हमारी पुकार
पहले भी सुनी है।

29:53.626 --> 29:55.961
वह फिर से सुनेगा।

29:56.045 --> 30:01.133
मैं फिर कभी अपनी मौजूदगी में
यह नाम नहीं सुनना चाहती।

30:03.761 --> 30:05.137
मैं इससे ऊब चुकी हूँ।

30:13.771 --> 30:14.939
नहीं, हम…

30:16.482 --> 30:19.235
हम… हमें कुछ तो करना होगा।

31:13.914 --> 31:14.748
मीखाल।

31:18.043 --> 31:19.587
मैं पिताजी के पास जा रही हूँ।

31:19.670 --> 31:21.839
जंग के मैदान में? दिमाग खराब हो गया है?

31:21.922 --> 31:22.965
उन्हें मेरी ज़रूरत है।

31:23.090 --> 31:23.924
मुझे ज़रूरत है।

31:24.717 --> 31:28.262
मीखाल, हमारे भाई जा चुके हैं,
हमारी माँ हार मान चुकी है।

31:28.345 --> 31:29.346
अब बस हम बचे हैं।

31:30.055 --> 31:31.599
फिर मेरे साथ चलो।

31:32.266 --> 31:33.434
बेवकूफ़ मत बनो।

31:33.517 --> 31:34.852
हम जाकर क्या कर सकते हैं?

31:35.019 --> 31:39.565
अगर पिताजी होश में आ गए,
तो सेना की कमान संभाल सकेंगे।

31:40.524 --> 31:43.068
फिर हमेशा की तरह
वह हमारे दुश्मनों को हरा सकते हैं।

31:44.028 --> 31:46.030
तुम्हें लगता है
तुम उन्हें होश में ला सकती हो?

31:51.660 --> 31:53.704
तुम्हें पता भी है एलाह किस तरफ है?

31:53.871 --> 31:55.789
उत्तर की ओर।

31:56.624 --> 31:57.583
उत्तर में?

31:57.666 --> 31:59.793
मैं उत्तर की ओर जाऊँगी और मैं ढूँढ़ लूँगी।

32:00.919 --> 32:02.087
हर हाल में।

32:03.047 --> 32:04.006
बहुत अच्छे।

32:06.175 --> 32:07.509
ठीक है। तो चलो।

32:08.594 --> 32:10.804
-तुम क्या कर रही हो?
-मेरी मदद तो करो।

32:16.810 --> 32:19.104
तुम भी मर गईं,
तो मेरा दिल बहलाने को कोई नहीं होगा।

32:22.650 --> 32:24.318
ख़ैर, ऐसा नहीं होगा।

32:27.488 --> 32:29.615
सुनो। शुक्रिया।

32:30.949 --> 32:32.201
वह मेरे भी पिता हैं।

32:33.619 --> 32:35.204
और मैं माँ की बात से सहमत नहीं।

32:35.913 --> 32:37.331
एक उम्मीद की किरण हमेशा होती है।

32:40.876 --> 32:41.710
सही कहा।

32:42.336 --> 32:43.379
चलो।

32:58.352 --> 33:01.105
कायरों और गद्दारों से भरा एक पूरा कबीला।

33:01.188 --> 33:02.398
ज़ुबान सँभालकर बात करो।

33:02.481 --> 33:05.943
तुम गुफ़ाओं में छुप कर अपने भाइयों को
इस दुश्मन का सामना करते देखना चाहोगे?

33:06.026 --> 33:07.986
उनका सामना मौत से है।

33:08.070 --> 33:09.905
एलिअब, बात क्या है?

33:10.906 --> 33:15.828
ज़ेबुलन कबीले ने इस जंग को
और महाराज को पीठ दिखाने का फैसला किया है।

33:16.787 --> 33:17.788
कितने लोगों ने?

33:18.205 --> 33:19.164
पूरे कबीले ने।

33:19.373 --> 33:21.625
उनके साथ एक दैत्य है। हमारे साथ कोई नहीं।

33:22.376 --> 33:26.255
ज़ेबुलन ईश्वर के लिए लड़ता है
और ईश्वर हमारे महाराज के साथ नहीं है।

33:26.338 --> 33:31.468
पूरे इज़राइल को बता दो कि ज़ेबुलन ने
अपने डर के आगे घुटने टेक दिए हैं,

33:31.552 --> 33:34.096
और जब हम इस जंग को लड़ेंगे
और जीत हासिल करेंगे,

33:34.179 --> 33:38.767
तब हमारे और उनके बच्चे ये कहानी सुनाएँगे
कि कैसे तुम लोग भाग खड़े हुए।

33:40.352 --> 33:42.646
अगर तुम्हें जीत का इतना यकीन है,

33:42.730 --> 33:45.566
तो तुम्हीं दैत्य का सामना क्यों नहीं करते,
जेसी के बेटे?

33:52.114 --> 33:53.490
मैं उन्हें दोष नहीं दूँगा।

33:54.366 --> 33:58.704
बगैर कुछ किए
यहाँ बस दिन पर दिन बीते जा रहे हैं।

33:59.288 --> 34:03.167
जंग के मैदान में कदम रखने से पहले
हम भूख से ही मारे जाएंगे।

34:03.834 --> 34:05.586
यह कोई रणनीति नहीं हुई।

34:05.669 --> 34:06.628
इसे कायरता कहते हैं।

34:06.712 --> 34:10.758
एड्रियल, तुम अपने युवराज से बात कर रहे हो।

34:10.841 --> 34:14.887
हाँ। एक पागल राजा के बेटे,
मिटती हुई विरासत के वारिस से।

34:14.970 --> 34:15.804
बहुत हुआ।

34:16.180 --> 34:19.475
अगर तुम्हारे पिता अगुआई नहीं करेंगे,
तो मैं करूँगा।

34:21.393 --> 34:23.395
मैं कहता हूँ हम लड़ेंगे।

34:23.520 --> 34:25.189
हाँ। हम लड़ेंगे।

34:25.272 --> 34:30.819
और भले ही हम जीत न पाएँ,
पर कम से कम कोशिश करके तो मरेंगे।

34:32.112 --> 34:33.822
ईश्वर और इज़राइल के लिए।

34:34.615 --> 34:36.825
ईश्वर और इज़राइल के लिए।

34:40.078 --> 34:41.538
हो गया। भाग जाओ।

34:41.622 --> 34:44.041
अपने बाप के साथ खेमे में छिप जाओ।

34:44.458 --> 34:46.710
एक और शब्द बोला
तो वो तुम्हारा आख़िरी शब्द होगा।

34:47.544 --> 34:50.088
और कोई बगावत के बोल बोलेगा?

34:56.011 --> 34:58.013
-आप क्या कर रहे हैं?
-मैं उस दैत्य का सामना करूँगा।

34:58.096 --> 34:59.890
-नहीं, आप नहीं करेंगे।
-एड्रियल ने सच कहा।

35:00.766 --> 35:01.975
किसी को तो करना होगा।

35:02.476 --> 35:03.519
तो मैं ही सही।

35:03.852 --> 35:05.729
और क्या लगता है अंजाम क्या होगा?

35:07.606 --> 35:08.565
वह परमेश्वर तय करेगा।

35:09.358 --> 35:11.652
वह दैत्य तुम्हारे टुकड़े कर देगा।

35:11.735 --> 35:14.279
हमारी पूरी फ़ौज के सामने
वह तुम्हें बीच से चीर डालेगा।

35:14.363 --> 35:15.656
और कोई रास्ता नहीं है।

35:17.658 --> 35:18.742
हाँ, बिल्कुल है।

35:20.953 --> 35:21.954
बिल्कुल है।

35:45.269 --> 35:47.354
अब तक माँ को
हमारे जाने का पता चल चुका होगा।

35:48.772 --> 35:50.899
अगर महल में कोई भी अच्छा घुड़सवार होता,

35:50.983 --> 35:52.943
तो हमें रोकने को वह उसे ज़रूर भेजतीं मगर…

35:53.902 --> 35:55.195
या फिर नहीं भेजतीं।

35:56.238 --> 35:58.323
मुझे लगता है
वह मेरी शक्ल नहीं देखना चाहतीं।

35:58.407 --> 36:01.451
यह जानकर तसल्ली कर लो कि तुमने वह खोया
जो उन्होंने मुझे कभी नहीं दिया।

36:05.455 --> 36:06.707
तुम्हें डर लग रहा है?

36:07.875 --> 36:09.376
अभी इन बातों का वक़्त नहीं है।

36:15.048 --> 36:16.133
मीखाली।

36:16.842 --> 36:18.010
भूलना मुश्किल है, है न?

36:19.094 --> 36:21.054
-गीत को?
-नहीं।

36:21.847 --> 36:23.015
डेविड को।

36:24.683 --> 36:25.767
वह हमारे पिता को छोड़ गया।

36:25.851 --> 36:28.061
मैं उसके बारे में नहीं सोचना चाहती।

36:50.042 --> 36:52.586
ओबेड के बेटे जेसी, तुम पर सलामती हो।

36:53.253 --> 36:56.924
तुम्हारे खानदान के गुनाहों को
कुर्बानी देकर मिटा दिया गया है।

36:57.007 --> 36:58.842
एक बेहतरीन कुर्बानी।

36:58.926 --> 37:00.427
तुमने जानवर को कैसे चुना?

37:01.470 --> 37:03.013
नियमों का पालन करते हुए।

37:03.180 --> 37:04.056
मुझे बताओ।

37:04.765 --> 37:06.099
झुंड के सबसे बेहतरीन जानवर को।

37:07.309 --> 37:09.102
जो बगैर दाग-धब्बे वाला हो।

37:10.020 --> 37:12.147
-मूसा के नियम यही हैं न?
-हाँ।

37:12.230 --> 37:13.148
हाँ, बेशक।

37:14.608 --> 37:15.984
अब, तुम जाओ।

37:17.194 --> 37:18.987
मुझे तुम्हारे पिता से बात करनी है।

37:19.863 --> 37:21.573
मैं पूरब के मैदान में मिलूँगा।

37:22.824 --> 37:24.868
बात ख़त्म करके आइएगा ज़रूर, मेरे नबी।

37:24.952 --> 37:27.245
मैं आपको भेड़ों को चराना सिखाऊँगा।

37:32.084 --> 37:35.837
इस कुर्बानी की तुम्हें ख़ुशी मनानी चाहिए।

37:36.630 --> 37:39.299
परमपिता परमेश्वर की कृपा तुम्हारे घर पर
बानी हुई है…

37:42.260 --> 37:44.846
मगर तुम्हारे दिल पर बोझ है।

37:46.181 --> 37:50.185
झूठ से बड़ा कोई और बोझ नहीं होता।

37:50.268 --> 37:51.728
सही कहा न, जेसी?

37:55.190 --> 38:00.570
जब राजा सॉल ने तुम्हारे बेटों को
जंग में लड़ने के लिए बुलाया,

38:00.946 --> 38:03.323
तब तुमने उन्हें जाने दिया।

38:04.408 --> 38:05.909
जब मैंने तुम्हारे बेटों बुलाया,

38:05.993 --> 38:08.161
तुम उन्हें, उन सभी को मेरे सामने लाने में

38:08.245 --> 38:10.122
एक ज़रा भी नहीं झिझके।

38:10.998 --> 38:13.458
सभी को बुलाया, सिवाए एक के।

38:16.003 --> 38:17.838
तुम उसे लेकर इतने सख़्त क्यों हो?

38:21.341 --> 38:26.096
मैं उसके भले और इस परिवार को
शर्मिंदगी से बचाने के लिए ऐसा करता हूँ।

38:26.179 --> 38:30.892
जेसी, सच बोलो।

38:34.187 --> 38:35.397
मेरा बेटा डेविड।

38:37.733 --> 38:41.153
डेविड नौजवान है, ज़िद्दी है, बेताब है।

38:43.238 --> 38:45.282
जैसे उसके दिल में एक आग धधक रही हो।

38:46.074 --> 38:48.869
वह अडिग है, छल-कपट नहीं जानता।

38:48.952 --> 38:50.996
हाँ। तुम सही कह रहे हो।

38:51.079 --> 38:52.789
और आप परमेश्वर की ज़ुबान बोलते हैं।

38:54.291 --> 38:57.502
फिर तो आप जानते होंगे
कि डेविड राजा नहीं बन सकता।

38:58.253 --> 39:00.213
बेशक आपने यह देखा होगा।

39:01.381 --> 39:03.258
मैं तुम्हें बताऊँ मैंने क्या देखा है?

39:05.469 --> 39:07.095
तुम सही हो।

39:07.179 --> 39:10.682
तुम सही हो कि तुम्हारे बेटे के दिल में
एक धधकती हुई आग है,

39:10.766 --> 39:13.310
जो सब कुछ जलाकर राख कर सकती है,

39:14.102 --> 39:15.812
उस उपरवाले की तरह।

39:16.313 --> 39:19.399
और इसीलिए परमेश्वर ने उसे चुना है

39:19.483 --> 39:22.986
और शायद यही वजह है
कि उन्होंने उसे चुना है।

39:24.321 --> 39:30.243
तो, अब तुम, एक इंसान होकर,
उस परमेश्वर के रास्ते में खड़े हो।

39:32.287 --> 39:35.540
ऐसा इसलिए क्योंकि तुम्हारी गलती का अंजाम
यह बेटा है।

39:35.624 --> 39:40.337
जेसी का बेटा, जेसी के गुनाह का अंजाम,
अगर चुना गया तो सब ऐसा बोलेंगे इसे लेकर?

39:40.420 --> 39:42.547
क्या यही शर्मिंदगी तुम्हें मजबूर करती है?

39:42.631 --> 39:43.840
नहीं। ऐसा नहीं है।

39:43.924 --> 39:44.800
बात कुछ और है।

39:44.883 --> 39:47.010
बात तुम्हारे दिल की गहराई से जुड़ी है

39:47.094 --> 39:50.305
और फिर भी ये वो बात है
जो तुमने अब तक किसी से नहीं कही।

39:53.183 --> 39:55.477
क्या परमेश्वर मुझसे कुछ चाहता है,

39:56.311 --> 39:57.896
उसके अलावा कुछ और,

39:58.313 --> 40:00.107
मैं अपना सबकुछ दे दूँगा।

40:00.774 --> 40:02.484
तुमने परमेश्वर को काफी कुछ दिया है,

40:02.567 --> 40:05.112
मगर अपना सबकुछ नहीं दिया है।

40:05.195 --> 40:08.907
वह नहीं दिया जो तुम्हें सबसे प्यारा है।

40:10.325 --> 40:15.455
तुमने झुंड के सबसे बेहतरीन को नहीं दिया।

40:19.126 --> 40:22.003
ये वो कुर्बानी है जो सबसे बड़ी होती हैं।

40:22.087 --> 40:26.842
परमेश्वर हमसे यही चाहता है।

40:27.759 --> 40:30.637
हम उसे वह दें जो हमें सबसे प्यारा है।

40:33.181 --> 40:34.975
अगर तुम उसे मुट्ठी में रखना चाहोगे…

40:38.728 --> 40:40.438
तो तुम्हारी उँगलियाँ टूट जाएँगी।

40:48.363 --> 40:53.368
मेरा सामना करने अपना सूरमा भेजो
वरना तुम सब मारे जाओगे।

40:54.619 --> 40:57.539
कायर कहीं के! तुम सभी के सभी कायर हो!

40:57.622 --> 41:00.292
याद है जब फिलिस्तीनी मिखमाश में
इकट्ठे हुए थे?

41:01.501 --> 41:03.211
तब किसी में सामना करने हिम्मत नहीं थी।

41:03.295 --> 41:04.713
हमारे लोग गुफाओं में छिप रहे थे।

41:06.089 --> 41:10.760
तुमने रात के अँधेरे में हमला किया, अकेले,
सिर्फ अपना कवच पहने हुए।

41:11.887 --> 41:13.889
तुमने उन्हें उलझाया और गुमराह किया।

41:13.972 --> 41:17.142
-हाशेम ने हमें जीत दिलायी।
-हाँ, मगर शुरुआती कदम तुमने उठाया।

41:17.225 --> 41:18.268
तुमने हमें उम्मीद दिलाया।

41:26.026 --> 41:27.527
ये लोग इज़राइल के नहीं लग रहे।

41:28.695 --> 41:29.988
आशेर के शिकारी हैं।

41:31.031 --> 41:33.700
मिस्र के सबसे बेहतरीन
किराये के सैनिक और कातिल।

41:34.993 --> 41:36.494
तुम रात में हमला करोगे,

41:37.204 --> 41:40.123
और अगर परमेश्वर ने साथ दिया,
तो तुम दैत्य को नींद में मार डालोगे।

41:41.750 --> 41:43.585
और आप मेरे पिता की देखरेख करेंगे?

41:44.294 --> 41:45.128
मैं करूँगा।

41:45.712 --> 41:46.796
मैं हर मुमकिन कोशिश करूँगा।

41:47.297 --> 41:48.465
मरते दम तक।

41:49.299 --> 41:50.217
आओ।

42:40.308 --> 42:42.477
परमेश्वर का अपने बंदे के लिए
क्या हुक्म है?

43:36.531 --> 43:37.574
क्यों?

43:39.200 --> 43:41.411
मुझे उस काम के लिए क्यों चुना
जो मैं नहीं कर सकता?

43:47.667 --> 43:49.169
काश मैं आपको समझ पाता।

43:50.420 --> 43:51.713
डेविड!

43:53.965 --> 43:56.301
डेविड! आ जाओ!

44:12.776 --> 44:14.819
पिताजी, आप कहाँ जा रहे हैं?

44:15.945 --> 44:17.697
मैं कहीं नहीं जा रहा।

44:20.992 --> 44:21.826
आओ, डेविड।

44:41.096 --> 44:43.765
कुछ बातें हैं जो काफी वक़्त से
मैं तुम्हें बताना चाहता था

44:43.848 --> 44:46.226
और अब समझ नहीं आ रहा कैसे कहूँ।

44:48.645 --> 44:50.605
डेविड, आओ।

44:50.688 --> 44:51.564
यहाँ आओ।

44:56.027 --> 44:57.862
डेविड, यहाँ आओ।

45:05.370 --> 45:08.623
मैंने अपनी पहली बीवी से सोच समझकर शादी की।

45:10.625 --> 45:14.754
हमारा रिश्ता समझदारी भरा था,
उसके और मेरे दोनों कबीलों के लिए।

45:14.838 --> 45:17.799
मेरे खानदान का नाम खराब हो गया था।

45:18.508 --> 45:20.427
-तुम्हारी दादी रूथ की वजह से।
-जानता हूँ।

45:20.510 --> 45:21.594
वह मोआबी थी।

45:22.595 --> 45:24.889
मगर मेरी बीवी, वह बिल्कुल पाक थी।

45:25.515 --> 45:27.183
उसने ताक़तवर बेटों को जन्म दिया।

45:27.267 --> 45:28.143
तुम्हारे भाइयों को।

45:30.395 --> 45:36.651
फिर उसकी मौत के बाद
मैं तुम्हारी माँ से मिला।

45:39.737 --> 45:43.116
वह बहुत अलग थी।

45:43.992 --> 45:46.911
मैं अपने लिए जो तलाश रहा था
उससे पूरी तरह अलग।

45:47.495 --> 45:49.581
हमारे लोगों के दुश्मनों में जन्मी थी।

45:50.248 --> 45:53.293
मगर फिर भी उसका जज़्बा, उसकी गर्मजोशी…

45:54.752 --> 45:56.463
कुछ ऐसी थी जो मैं कभी नहीं जान पाया था।

45:59.007 --> 46:00.467
मैंने उसे जल्दबाज़ी में चुन लिया।

46:01.718 --> 46:02.927
रस्मों के खिलाफ शादी की…

46:05.930 --> 46:07.348
मगर मैं उसे बेहद चाहता था, डेविड।

46:08.308 --> 46:11.853
ऐसी चाहत जिसकी कोई हद नहीं थी।

46:14.147 --> 46:15.356
और वह भी मुझे चाहती थी।

46:22.405 --> 46:24.199
तुम्हारी माँ के कहे आख़िरी शब्द…

46:24.949 --> 46:26.034
मैं जानता हूँ।

46:26.117 --> 46:27.285
मेरा ख्याल रखने को कहा।

46:27.368 --> 46:28.453
नहीं।

46:28.536 --> 46:30.330
उसने ऐसा नहीं कहा था।

46:36.753 --> 46:39.464
"उसे उड़ने देना।"

46:45.136 --> 46:46.846
उसे उड़ने देना।

46:52.894 --> 46:54.354
उसने यही कहा था।

46:57.899 --> 46:59.776
तुम्हारी माँ को दृश्य दिखते थे।

47:00.276 --> 47:03.696
तुम्हारे बारे में उसे सपने आते थे
कि बड़े होकर तुम क्या बनोगे।

47:05.907 --> 47:10.453
जंग के सपने आते थे,
खूबसूरत और डरावने दोनों तरह के।

47:12.914 --> 47:14.415
और उसकी आख़िरी ख़्वाहिश यह थी…

47:17.919 --> 47:20.672
कि मैं तुम्हें उन सपनों को
पूरा करने जाने दूँ।

47:22.215 --> 47:24.467
मुझे माफ़ कर दो, मेरे बेटे।

47:25.134 --> 47:26.219
मुझे माफ़ कर दो।

47:27.679 --> 47:29.097
मैंने तुम्हें यहाँ अपने पास रखा

47:29.180 --> 47:31.849
क्योंकि तुम उसकी एक आख़िरी निशानी हो
जो कि मेरे पास बची है।

47:33.101 --> 47:37.230
मैं तुम्हें मैदान में इसलिए नहीं भेजता
था कि तुमसे शर्मिंदगी होती है।

47:39.023 --> 47:44.612
बल्कि इसलिए तुम्हें यहाँ रखा, क्योंकि,
डेविड मैं तुमसे प्यार करता हूँ।

47:45.905 --> 47:47.198
और मैं उससे भी प्यार करता था।

47:51.119 --> 47:52.203
मुझे माफ़ कर दो, बेटे।

47:59.460 --> 48:00.295
अब चलो।

48:00.753 --> 48:03.131
मैंने गधे पर तुम्हारे खाने
और ज़रूरत के सामान रख दिए हैं।

48:03.214 --> 48:04.882
मैं चाहता हूँ तुम उन्हें लेकर जाओ।

48:05.216 --> 48:06.092
कहाँ?

48:10.013 --> 48:11.222
जंग के मैदान में।

48:12.932 --> 48:14.017
अपने भाइयों के पास।

48:38.791 --> 48:40.168
चरवाहों के सूरमा।

48:44.505 --> 48:48.176
वक़्त से पहले एक राजा की ज़िम्मेदारी संभालना
एक भारी बोझ है।

48:50.053 --> 48:50.887
हमें अकेला छोड़ दो।

48:57.393 --> 48:58.603
तुम यहाँ क्या कर रहे हो?

48:59.854 --> 49:02.649
ज़रूरत की इस घड़ी में सलाह लेकर आया हूँ।

49:03.274 --> 49:06.152
जैसे आपके पिता की सेवा की
आपकी सेवा करने आया हूँ।

49:09.405 --> 49:12.241
डोएग, तुम किसी की सेवा नहीं करते।

49:14.410 --> 49:15.995
और किसी ईश्वर को नहीं मानते।

49:20.708 --> 49:25.129
मुझे लगता है आपके सामने उस दैत्य से
बड़ी एक और परेशानी है।

49:29.592 --> 49:34.597
बातें बहुत दूर तक फैलती हैं,
कोई ध्यान लगाकर सुने तो उसे सुन सकता है।

49:35.431 --> 49:39.560
ऐसी कहानियाँ सुनने को मिल रही हैं
कि महान नबी बेथलेहेम शहर में

49:39.644 --> 49:41.020
जूडाह कबीले की तरफ सफर पर गए हैं।

49:42.605 --> 49:44.982
मैं आपके बेहद काम आ सकता हूँ।

49:45.566 --> 49:46.693
अगर आप आदेश देंगे,

49:46.776 --> 49:48.778
तो वह जो कोई भी हो
जिसे आपके पिता के बदले में

49:48.861 --> 49:52.490
उन्होंने चुना है
मैं उसे मौत की नींद सुला सकता हूँ।

49:52.573 --> 49:54.325
अगर मेरे पिता का नाम दोबारा लिया…

49:55.034 --> 49:57.620
मुझे बस उसका नाम बताइए।

49:58.579 --> 50:00.915
एक आख़िरी चाल चलिए, राजकुमार जोनाथन।

50:00.998 --> 50:04.210
डोएग, मेरे पास तुम्हारे साथ
खेल खेलने का वक़्त नहीं है।

50:04.293 --> 50:05.294
ठीक है।

50:06.337 --> 50:11.217
फिर जाइए। जाकर वो जंग लड़िए
जो आप कभी नहीं जीत सकते हैं।

50:18.349 --> 50:21.060
मेरी बात समझ लो, ऐडोमाइट।

50:23.271 --> 50:25.022
जंग के मैदान में भले ही मेरी जान चली जाए,

50:26.899 --> 50:29.902
मगर वह पल तब तक नहीं आएगा
जब तक तुम्हारी आँखों में मौत न देख लूँ।

50:31.612 --> 50:33.865
यह देखना दिलचस्प होगा।

50:51.591 --> 50:52.842
मैं सच जानता हूँ, पिताजी।

50:55.595 --> 50:57.805
मगर यह भी जानता हूँ कि मैं आपका बेटा हूँ।

50:58.806 --> 51:03.728
मैं आपसे प्यार करता हूँ और
अंत तक आपके साथ रहूँगा।

51:16.324 --> 51:17.533
अब सो जाइए।

51:19.952 --> 51:22.872
और अगर आपको होश आ गया,
तो मेरे लिए दुआ कीजिएगा।

51:23.581 --> 51:24.457
नहीं।

51:25.792 --> 51:28.503
नहीं!

51:48.898 --> 51:50.441
नहीं।

51:50.983 --> 51:51.984
जोनाथन।

51:52.068 --> 51:53.194
नहीं!

52:15.842 --> 52:16.843
ईश्वर तुम्हारा साथ दे।

52:45.329 --> 52:46.289
मेरे बेटे।

52:49.834 --> 52:50.835
मैं तुमसे प्यार करता हूँ।

52:51.210 --> 52:52.253
मैं भी आपसे प्यार करता हूँ।

52:56.173 --> 52:57.049
ठीक है।

53:08.019 --> 53:09.103
क्या हम साथ चलेंगे?

53:10.062 --> 53:12.023
मुझे अपना सफर तय करना है।

53:13.524 --> 53:15.776
तुम्हें वह पहली बात याद है
जो मैंने तुमसे कही थी?

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मैंने कहा था, "परमेश्वर वह देखता है
जो इंसान नहीं देख सकता।"

53:22.408 --> 53:25.036
"वह दिलों के अंदर देखता है।"

53:25.369 --> 53:29.498
और तुम… तुम्हारा दिल शेर का है।

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और शेर क्या करते हैं?

53:36.714 --> 53:38.007
वो दहाड़ते हैं।

53:54.440 --> 53:55.858
उड़ो, मेरे बेटे।

53:57.610 --> 53:58.569
ऊपर उड़ो।

54:04.575 --> 54:06.827
हम यह और कितने दिन करते रहेंगे?

54:07.411 --> 54:10.873
क्या पूरे इज़राइल में एक भी जाँबाज़ नहीं है…

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जो मुझसे लड़ सके?

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संवाद अनुवादक महताब आलम

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रचनात्मक पर्यवेक्षक
दिनेश शाकुल
नहीं है…
