WEBVTT

00:04.422 --> 00:06.257
हाउस ऑफ़ डेविड में अब तक…

00:06.382 --> 00:08.676
हमारे खिलाफ़ फिलीस्तीनियों ने
सभी सेनाएं एकजुट कर ली हैं।

00:08.759 --> 00:10.720
-और उनके पास एक दैत्य है।
-क्या?

00:10.803 --> 00:12.179
कहाँ है तुम्हारा राजा?

00:12.263 --> 00:14.014
-वह बस एक इंसान है, पिताजी?
-सच में?

00:16.684 --> 00:17.518
पिताजी।

00:17.601 --> 00:21.063
ज़ेबलून के कबीले ने हमारी इस लड़ाई में
पीठ दिखाने का फैसला किया है।

00:21.147 --> 00:22.314
हमें कुछ करना होगा।

00:22.398 --> 00:24.734
-तुम्हें एलाह का रास्ता भी पता है?
-मैं ढूँढ़ लूँगी।

00:24.817 --> 00:27.903
मैंने गधे पर ज़रूरी सामान लाद दिया है।
मैं चाहता हूँ तुम वो लेकर जाओ।

00:27.987 --> 00:30.030
-कहाँ?
-जंग के मैदान में।

00:30.114 --> 00:32.825
रात के अंधेरे में हमला करना,
नींद में उस दैत्य को मार डालना।

00:35.870 --> 00:39.665
एलाह का दर्रा
फ़िलिस्तीनी खेमे के छोर पर

00:56.599 --> 00:57.641
तुम कहाँ से हो?

00:58.434 --> 01:02.146
एनडोर से। मगर बचपन के बाद से
वहाँ कभी नहीं गया।

01:02.229 --> 01:06.192
जहाँ तक मुझे पता है एनडोर से कोई नहीं
निकल सकता। फिर तुम कैसे निकले?

01:07.151 --> 01:08.194
जान लेना सीखकर।

01:14.158 --> 01:16.494
मुझे आग और धुआँ दिखाई दे रहा है।

01:17.953 --> 01:20.790
हाँ, पिताजी का खेमा होगा।
हम ज़्यादा दूर नहीं हैं।

01:26.629 --> 01:28.881
ज़ेबलून का कबीला
इज़राइली खेमे से पीछे हटते हुए

02:06.252 --> 02:08.838
माफ़ करना, राजकुमार।
पर उन्होंने ज़्यादा रकम दी।

02:24.979 --> 02:26.021
जोनाथन।

02:31.902 --> 02:33.988
मैंने इसका सालों से इंतज़ार किया है।

02:34.989 --> 02:36.866
उस दिन से
जब तुम्हारे पिता ने मेरे पिता को मारा।

02:49.378 --> 02:51.130
मीराब, वो देखो।

02:52.423 --> 02:54.008
रुको। रुक जाओ।

02:55.467 --> 02:56.927
अरे नहीं, कुछ तो गड़बड़ है।

02:58.095 --> 03:01.599
कुछ गड़बड़ है। उतरो। नीचे उतरो।

03:06.770 --> 03:07.855
रुक जाओ।

03:07.938 --> 03:09.899
रुको। रुक जाओ।

03:18.574 --> 03:19.491
क्या हो रहा है?

03:23.495 --> 03:24.663
यह क्या है?

03:34.173 --> 03:35.507
आग!

03:35.591 --> 03:37.259
आग!

03:37.343 --> 03:39.929
भागो! जान बचाओ!

03:45.851 --> 03:48.354
तुमने सुना? वो चारों तरफ से घिरे हैं।

04:07.957 --> 04:10.584
हमें घर लौट जाना चाहिए। चलो चलें।

04:10.668 --> 04:14.296
नहीं। मीराब, पिताजी को हमारी ज़रूरत है।

04:16.256 --> 04:17.216
चलो आगे बढ़ते हैं।

04:21.178 --> 04:24.473
उनके लिए ग़मगीन क्यों हो रहे हो
जिन्होंने तुम्हें पीठ दिखा दी?

05:00.968 --> 05:01.885
रुक जाओ।

05:05.264 --> 05:06.682
तुम हार चुके हो।

05:19.945 --> 05:22.448
तुम घुटने टेक दो
वरना हम ऐसा करने को मजबूर कर देंगे।

05:33.375 --> 05:40.215
हाउस ऑफ़ डेविड

06:11.914 --> 06:13.540
योआब, ये पहले से काफी धारदार है।

06:19.755 --> 06:20.672
सुनो तुम सब!

06:22.341 --> 06:23.175
सुनो!

06:23.258 --> 06:26.178
बहुत खूब। अब हम एक दूसरे से ही लड़ रहे हैं।

06:26.887 --> 06:28.972
भूख इंसान से कुछ भी करवाती है।

06:39.483 --> 06:40.692
लो वह फिर से आ गया।

06:42.361 --> 06:43.445
बिल्कुल अपने वक़्त पर।

07:24.695 --> 07:30.159
ये उन कातिलों के सिर हैं

07:30.242 --> 07:32.870
जिन्हें कल रात तुमने
मेरी जान लेने को भेजा था।

07:34.580 --> 07:35.664
कैसे कातिल?

07:38.750 --> 07:40.085
डरपोक कहीं के।

07:41.170 --> 07:43.755
तुम दिन के उजाले में
मेरा सामना नहीं कर सकते,

07:43.839 --> 07:45.841
तो जब मैं सो रहा होऊँगा
तब मुझे मारने की कोशिश करोगे।

07:47.050 --> 07:50.762
तो देख लो, यही अंजाम तुम्हारा भी होगा।

07:52.389 --> 07:54.057
बिल्कुल अपने राजकुमार की तरह।

07:54.766 --> 07:56.727
सेनापति आबनर, जोनाथन कहाँ है?

08:05.861 --> 08:06.904
संभलकर!

08:12.993 --> 08:18.582
आज मैं यहाँ खड़े होकर,
इज़राइल की सेना को चुनौती देता हूँ।

08:19.791 --> 08:22.419
मैं इज़राइल के राजा को चुनौती देता हूँ।

08:23.754 --> 08:27.049
मैं इज़राइल के परमेश्वर को चुनौती देता हूँ।

08:28.383 --> 08:30.302
तुम अपने किसी जांबाज़ को चुन लो।

08:31.595 --> 08:33.764
या अपने याह्वेह को ही मुझसे लड़ने भेजो।

08:34.932 --> 08:36.725
शायद मैं उसी की जान ले लूं।

08:38.310 --> 08:41.230
मगर देखना वह भी तुम्हारी तरह डरपोक न हो।

08:42.648 --> 08:45.150
मेरे दोस्त, वक़्त निकला जा रहा है।

08:47.069 --> 08:49.988
आज, मैं आठों कबीले के सरदारों से मिला हूँ।

08:50.072 --> 08:54.868
तो, या तो मेरा साथ दो या सॉल के साथ मरो।

09:20.560 --> 09:21.937
तुम कल रात अच्छा लड़े।

09:23.188 --> 09:26.692
बेकार था, मगर दिलचस्प था।

09:31.196 --> 09:32.489
तो, तुम्हारा परमेश्वर कहाँ है?

09:37.494 --> 09:40.372
मुझे तुम्हारे खेमे से
कुर्बानी का धुआँ उठता नहीं दिख रहा।

09:42.499 --> 09:44.418
क्या महान नबी ने तुम्हें ठुकरा दिया।

09:46.128 --> 09:48.130
अगर ऐसा है, तो क्यों?

09:50.924 --> 09:52.676
तुम मेरे साथ खाना खाना चाहोगे?

09:55.178 --> 09:57.180
मैं कायरों के साथ खाना नहीं खाता।

10:00.100 --> 10:02.436
मैं हमेशा से
तुम्हारी हिम्मत का कायल रहा हूँ, जोनाथन।

10:03.687 --> 10:05.856
फिर भी, तुम्हें आंकना बेहद आसान है।

10:07.316 --> 10:09.693
तो सॉल के बेटे, खेल कुछ इस तरह है।

10:10.610 --> 10:12.529
सामने से लग रहा होगा कि…

10:12.612 --> 10:15.365
मैं सभी चार फ़िलिस्तीनी सेनाओं को
एक साथ नहीं ला पाया हूँ।

10:15.907 --> 10:19.578
मगर नहीं।
मैंने पाँचों को एक साथ कर लिया है।

10:20.746 --> 10:23.915
फिलहाल एक्रॉन और भी कई दैत्यों के साथ
तुम्हारी सेना के पीछे है।

10:26.126 --> 10:29.504
अब तुम लोग पूरी तरह से घिर चुके हो
और तुम्हारे एक के बदले हम तीन हैं।

10:31.590 --> 10:33.467
तुमने जो कहा अगर वह सच है,

10:35.344 --> 10:36.845
तो हम पर चढ़ाई क्यों नहीं की?

10:37.554 --> 10:40.390
एक ही बार में हर तरफ से।
और इसे ख़त्म ही कर देते।

10:41.016 --> 10:44.311
सदियों पहले,
मेरे लोग महान सागर के पार से आए थे।

10:44.895 --> 10:49.358
राजाओं, शाही खानदानों के बेटे जिन्हें
मिस्र और इस सरज़मीन पर राज करने भेजा था।

10:49.983 --> 10:52.486
हमारे देवताओं ने हमें
ताँबे और लोहे के रूप में

10:52.569 --> 10:54.112
अलौकिक ताक़त देकर हमें भेजा था।

10:54.196 --> 10:57.616
पाँच सौ साल पहले।
फिर भी मिस्र साम्राज्य कायम है।

10:59.743 --> 11:01.870
-क्योंकि तुम्हारे पिता…
-मेरे पिता कमज़ोर थे।

11:03.163 --> 11:04.247
हम दोनों एक से हैं।

11:04.331 --> 11:06.625
मेरे पिता राजा हैं
तुम्हारे पिता कुत्ते की मौत मारे गए।

11:06.708 --> 11:09.336
तुम्हारे पूर्वज, मिस्र के गुलाम थे।

11:09.419 --> 11:11.963
तुम लोग जिन्हें महान मानते हो
उनकी कहानियों में मैंने सुना है।

11:12.047 --> 11:13.673
-वो मूसा है।
-सही कहा।

11:15.050 --> 11:18.470
पता है उन्होंने कितनी बार लिखा है
कि तुम लोग गुलामी में ही ख़ुश थे?

11:18.970 --> 11:23.016
वहाँ लौटने को तरसते थे,
जहाँ पर राज करने को फ़िलिस्तीनी चुने गए थे।

11:24.059 --> 11:26.770
यहूदियों को गुलाम रहने को ही बनाया गया है।

11:29.564 --> 11:34.319
तुम इस दुनिया में गुलाम बनकर आए थे
और गुलाम बनकर ही लौटोगे।

11:34.403 --> 11:36.279
क्योंकि, यही तुम लोगों पर जँचता है।

11:36.363 --> 11:38.115
नहीं, हमने अपनी मर्ज़ी से मिस्र छोड़ा।

11:40.575 --> 11:42.536
और जब उन्होंने हमें रोकने की कोशिश की,

11:43.995 --> 11:46.415
तो हमारे परमेश्वर ने मिस्र की सेना को
लाल सागर में डुबो दिया।

11:46.498 --> 11:48.667
-तुम्हारे परमेश्वर ने क्या किया?
-तो अब वह कहाँ है?

11:49.793 --> 11:52.587
-कहाँ है याह्वेह?
-हम उनका नाम नहीं लेते।

11:53.213 --> 11:56.091
-तुम लोग उनसे डरते हो।
-हाँ, हम डरते हैं।

11:57.676 --> 11:58.677
और तुम्हें भी डरना चाहिए।

12:02.264 --> 12:03.807
तुम्हें सालों पहले का वो दौर याद है,

12:04.433 --> 12:07.060
जब जंग के मैदान में
हमारा आमना-सामना हुआ था,

12:07.894 --> 12:10.230
और मेरे पिता ने
तुम्हारे पिता का सिर काटा था?

12:16.862 --> 12:20.157
तुम्हें अब भी वो पल याद आता है?
अब भी उनकी चीख याद आती है?

12:25.537 --> 12:27.581
मैंने उस दिन उनकी आँखों में डर देखा था।

12:28.373 --> 12:29.749
वही डर अभी भी देख रहा हूँ।

12:31.501 --> 12:35.589
अपने डर को गुस्से का मुखौटा बनाया हुआ है।

12:38.008 --> 12:40.969
बदला लेने की तुम्हारी भूख
तुम्हें कमज़ोर बनाती है, अकीश।

12:43.263 --> 12:44.890
दैत्य का साथ पाने से भी यह नहीं बदलेगा।

12:56.693 --> 12:58.737
जोनाथन, मैं चाहता हूँ
कि तुम पूरब की ओर देखो।

13:00.113 --> 13:01.364
सूरज को निकलते हुए।

13:02.824 --> 13:06.703
जब कल का सूरज डूबेगा,
मेरे सब्र का बाँध भी टूट जाएगा।

13:08.914 --> 13:12.751
और मैं अपनी सेना को आदेश दूँगा
कि तुम पर हर तरफ से हमला करे,

13:13.710 --> 13:15.378
और मैं किसी एक को भी ज़िंदा नहीं छोड़ूंगा।

13:16.338 --> 13:18.965
न ही औरतों को, न ही बच्चों को।

13:20.133 --> 13:23.970
न तुम्हारी माँओं को
और न तुम्हारी बहनों को।

13:24.888 --> 13:27.682
वो धीरे-धीरे मेरे हाथों मारे जाएँगे।

13:29.142 --> 13:33.438
और पूरा इज़राइल मातम मनाएगा,
अगर पूरे इज़राइल में कोई ज़िंदा बचा तो।

13:34.940 --> 13:38.318
अपने पिता के पास जाओ।
उन्हें हथियार डालने के लिए मनाओ।

13:40.111 --> 13:44.824
या उससे भी बेहतर, उन्हें मनाओ
कि वह सामने आकर मेरे दैत्य का सामना करें।

13:45.325 --> 13:46.493
और इज़्ज़त की मौत पाएं।

13:47.786 --> 13:51.748
सब मिलकर भी मेरे दैत्य को नहीं हरा सकते
और न ही इस जंग को जीत सकते हो।

13:52.916 --> 13:56.086
मगर तुम लोग गुलाम बनकर जी सकते हो,
जैसे कि मिस्र में रहते थे।

14:20.610 --> 14:23.822
और जोनाथन, अगर तुम्हारा जवाब न में है,

14:25.198 --> 14:26.616
तो मैं तुमसे वादा करता हूँ,

14:27.075 --> 14:30.870
अगली बार जब तुमसे मिलूँगा,
तब मेरा तीर तुम्हारे दिल के आर-पार होगा।

15:11.828 --> 15:12.954
केज़िया।

15:15.248 --> 15:16.124
कुछ बात करनी है।

15:24.299 --> 15:26.092
तुमने मेरी बेटियों को देखा है?

15:28.637 --> 15:29.888
वो अपने कमरे में नहीं हैं?

15:31.640 --> 15:33.266
मैंने सबसे पहले वहीं ढूँढ़ा था।

15:37.145 --> 15:42.609
वैसे उन्होंने पुराने लीवाइट, अहिमेलैक को
खोजने के बारे में कुछ तो बोला था।

15:44.194 --> 15:45.403
आख़िर किसलिए?

15:47.197 --> 15:50.867
जंग में अपने लोगों की सलामती की
मन्नत मांगने के लिए।

15:53.495 --> 15:54.454
मन्नत माँगने के लिए?

15:59.834 --> 16:01.711
मन्नत? और वो भी मीराब?

16:07.967 --> 16:11.054
मुझे यकीन है
तुम मुझसे अब और कोई झूठ नहीं बोलोगी।

16:14.265 --> 16:16.267
तो फिर पूछती हूँ, मेरी बेटियाँ कहाँ हैं?

16:18.770 --> 16:20.480
उन्होंने मुझे न बताने की कसम दी है।

16:21.940 --> 16:22.774
मैं…

16:24.025 --> 16:26.194
मुझे लगता है वे महल छोड़कर गईं हैं।

16:27.195 --> 16:28.947
छोड़कर गई हैं? मगर कहाँ?

16:31.533 --> 16:32.867
जंग के मैदान में।

16:35.036 --> 16:37.330
ज़रूरत के वक़्त में महाराज की मदद करने को।

16:38.331 --> 16:39.666
जंग के मैदान में गई हैं?

16:41.543 --> 16:42.669
और तुमने कुछ नहीं कहा?

16:44.254 --> 16:47.382
मुझे राजकुमारियों से सवाल-जवाब करने की
इजाज़त नहीं है।

16:53.179 --> 16:55.932
मुझे बताना तुम्हारी ज़िम्मेदारी थी।

16:56.683 --> 17:00.270
-मेहरबानी करके, मुझे बाहर मत निकालिए। मैं…
-जाओ यहाँ से।

17:01.020 --> 17:02.689
मेरी नज़रों से दूर हो जाओ।

17:22.625 --> 17:24.669
आ जाओ। हम करीब हैं।

17:33.052 --> 17:35.513
रुक जाओ! अपनी पहचान बताओ।

17:37.015 --> 17:38.266
राजकुमारी…

17:39.225 --> 17:40.435
हमें महाराज के पास ले चलो।

17:41.186 --> 17:43.396
जैसा कहें। इस तरफ।

17:58.995 --> 17:59.996
मीराब।

18:00.747 --> 18:03.124
-ज़रा इन्हें देखो।
-क्या देखूँ?

18:06.169 --> 18:07.587
कितने हताश हैं।

18:10.590 --> 18:11.591
सुनो।

18:13.843 --> 18:15.178
तुम पिताजी के पास जाओ।

18:15.261 --> 18:17.514
-उनका ख़्याल रखो। समझीं? जाओ।
-ठीक है।

18:17.597 --> 18:18.848
और तुम कहाँ जा रही हो?

18:18.932 --> 18:22.018
मैं सेनापति आबनर और जोनाथन को रास्ते में
जो देखा वो बताने जा रही हूँ, ठीक है?

18:22.101 --> 18:24.813
-इसे महाराज तक और मुझे सेनापति तक ले चलो।
-इस तरफ आइए।

18:31.236 --> 18:33.279
आज…

18:33.613 --> 18:36.074
तुम मुझसे मिलोगे।

18:37.534 --> 18:38.493
सैमुअल?

18:42.705 --> 18:44.499
आज से,

18:44.582 --> 18:50.380
ये यातना तुम भी सहोगे।

18:55.885 --> 18:57.011
पिताजी।

19:09.691 --> 19:10.525
नहीं।

19:12.443 --> 19:13.444
नहीं।

19:18.449 --> 19:19.617
मीखाल।

19:25.623 --> 19:27.166
मैं आपके लिए कुछ लाई हूँ।

19:27.458 --> 19:32.839
अगर धर्मगुरुओं को पता चला मैं धर्मग्रंथ के
पन्ने लेकर आई हूँ तो मुझे बद्दुआ देंगे।

19:33.798 --> 19:35.550
मगर मैं आपको वो पढ़कर सुनाना चाहती थी।

19:36.384 --> 19:38.928
जैसे हम पहले किया करते थे।

19:39.846 --> 19:42.849
"हम पर परमेश्वर की विशेष कृपा है।"

19:42.932 --> 19:44.017
याद है।

19:45.184 --> 19:47.687
ये वो शब्द हैं
जो परमेश्वर ने मूसा से कहे थे।

19:49.272 --> 19:52.066
"न तो तुम घबराओ और न ही डरो।"

19:53.401 --> 19:57.697
"परमपिता परमेश्वर तुम्हारा निगहबान है,
जो हमेशा तुम्हारे आगे ढाल बनकर रहता है,

19:59.073 --> 20:01.534
वह खुद तुम्हारी हिफाज़त करेगा,

20:02.243 --> 20:07.832
और उस रेगिस्तान में, तुम देख चुके हो
कि कैसे उसने तुम्हारा हाथ थामा,

20:11.961 --> 20:13.504
बिल्कुल एक पिता की तरह…

20:16.549 --> 20:18.134
जो अपने बच्चे का हाथ थामता है।"

20:21.095 --> 20:23.348
और जैसे आपने मेरा हाथ थामा।

20:27.352 --> 20:30.688
वह भी आपका हाथ थामेंगे।

20:31.898 --> 20:33.900
वह आपको वापसी का रास्ता दिखाएँगे।

20:34.943 --> 20:36.986
आपको बस अपनी आँखें खोलनी है।

20:38.863 --> 20:39.948
तो देखिए।

20:41.407 --> 20:42.700
उठ जाइए।

20:44.077 --> 20:45.370
उनके पास लौट आइए।

20:46.871 --> 20:48.498
हमारे पास लौट आइए।

20:49.582 --> 20:50.458
उठ जाइए।

20:51.334 --> 20:52.919
आँखें खोलिए।

20:53.002 --> 20:54.337
उठ जाइए।

20:54.420 --> 20:55.254
आँखें खोलिए।

20:55.713 --> 20:57.924
उठ जाइए। पिताजी, मेरे लिए।

20:59.300 --> 21:00.134
आँखें खोलिए।

21:01.719 --> 21:02.804
उठ जाइए।

21:03.846 --> 21:06.516
मेरी ख़ातिर। मुझे आपकी ज़रूरत है।

21:07.183 --> 21:11.396
आँखें खोलिए। उठ जाइए, पिताजी। मेरे लिए।

21:11.646 --> 21:12.647
आँखें खोलिए।

21:21.364 --> 21:22.240
मीखाल।

21:24.075 --> 21:25.410
तुम्हीं हो क्या?

21:29.455 --> 21:30.915
मेरी प्यारी बच्ची।

21:33.251 --> 21:34.252
परमेश्वर…

21:35.628 --> 21:38.923
परमेश्वर हमें ताक़त देंगे और बचाएंगे।

21:44.387 --> 21:45.680
वह हमेशा साथ देते हैं।

21:56.149 --> 21:56.983
महारानी।

22:19.172 --> 22:22.133
महारानी। आपको यहाँ नहीं रुकना चाहिए।

22:23.384 --> 22:25.470
कुछ लोग हैं
जो बचकर निकलने में आपकी मदद करेंगे।

22:26.596 --> 22:28.431
मैं छिपने वाली नहीं।

22:29.348 --> 22:30.391
क्यों?

22:33.311 --> 22:36.481
यहाँ रहकर कुछ हासिल नहीं होगा।

22:44.197 --> 22:45.823
जब मैं छोटी थी…

22:48.743 --> 22:50.286
मेरे पिता…

22:52.205 --> 22:54.165
घरवालों को मिस्र ले गए थे।

22:56.584 --> 23:00.671
पता नहीं क्यों मगर इतना याद है
वहाँ एक बड़ा जुलूस था।

23:02.131 --> 23:07.595
सड़कें लोगों से भरी हुई थीं।
हज़ारों की तादाद में लोग थे।

23:08.096 --> 23:09.931
और वो सब एक इंसान को देखने आए थे।

23:12.058 --> 23:13.226
फ़ैरो को।

23:15.603 --> 23:19.732
और वो लोग वहाँ घंटों खड़े रहे,
बस उसकी एक झलक पाने के लिए,

23:20.691 --> 23:26.531
और जब वह आख़िरकार सामने आया,
तो ऊपर से नीचे तक सोने में लदा था,

23:26.614 --> 23:27.740
कसम से…

23:30.326 --> 23:32.620
वह सूरज की तरह चमक रहा था।

23:43.297 --> 23:45.383
मगर जब हम घर लौटे,

23:46.717 --> 23:50.471
मुझे एहसास हुआ हमारा अपना ऐसा कोई नहीं है।

23:51.139 --> 23:57.562
हमारे पास नबी और हाकिम हुआ करते थे
जो मौके के हिसाब से राज करते थे।

23:58.813 --> 24:00.648
जिनमें से कुछ सच्चे और इंसाफ पसंद थे।

24:01.399 --> 24:02.525
बहुत से नहीं थे।

24:03.734 --> 24:07.488
सभी दावा करते कि वह उस परमेश्वर की तरफ से
बोल रहे हैं जिसने मुझे कभी बात नहीं की।

24:09.866 --> 24:11.159
मगर एक राजा,

24:12.368 --> 24:13.327
एक राजा को…

24:16.497 --> 24:18.833
मैं अपनी आँखों से देख सकती थी। तो…

24:21.627 --> 24:26.132
मैंने एक राजा का सपना देखने की हिम्मत की…

24:29.010 --> 24:32.013
जो हमारे कबीलों को एक कर सकता था।

24:40.938 --> 24:42.190
और देखो…

24:45.484 --> 24:47.195
मैंने उस सपने को सच किया।

24:50.031 --> 24:53.451
गरीबी से निकलकर यहाँ तक पहुँची।
इस महल तक।

24:54.994 --> 24:57.663
और अब मैं उसे अपने पैरों के नीच से
बिखरता देख रही हूँ।

25:06.756 --> 25:07.590
मेरी रानी।

25:08.591 --> 25:11.636
उन्हें मेरे लिए आने दो
ताकि मैं अपने सपने के साथ मर सकूँ।

25:12.929 --> 25:13.763
रुक जाओ!

25:32.156 --> 25:32.990
माँ।

26:09.902 --> 26:11.195
अपनी आँखें बंद करो…

26:13.114 --> 26:14.740
और ध्यान से सुनो।

26:15.199 --> 26:17.994
अपने कानों से नहीं,
बल्कि अपनी अंतरात्मा से।

26:20.538 --> 26:22.290
मन की गहराइयों में झांकों।

26:26.460 --> 26:29.714
और सुकून और खामोशी में,
तुम्हें परमेश्वर की आवाज़ सुनाई देगी।

26:31.424 --> 26:33.968
सुनो उसे।
वह तुम्हें बताएँगे कि तुम कौन हो।

26:34.635 --> 26:35.636
न कि ये लोग।

26:49.317 --> 26:52.653
मैं एक आख़िरी बार तुम लोगों को
यह मौका दे रहा हूँ।

26:53.571 --> 26:55.197
बचने का कोई तरीका नहीं है।

26:56.324 --> 26:57.533
न ही कोई उम्मीद है।

26:58.868 --> 27:01.454
मेरे लोगों ने तुम्हें घेर लिया है।

27:02.580 --> 27:05.207
-अपने जांबाज़ को भेजो…
-ये लोग कर क्या रहे हैं?

27:05.291 --> 27:07.209
…नहीं तो तुम सब मारे जाओगे।

27:13.132 --> 27:17.053
आज, मैं इज़राइल की सेना को चुनौती देता हूँ।

27:18.554 --> 27:22.516
मैं इज़राइल के राजा को चुनौती देता हूँ।

27:23.726 --> 27:26.604
मैं इज़राइल के परमेश्वर को चुनौती देता हूँ।

27:33.027 --> 27:36.113
हमारे शाश्वत परमेश्वर को चुनौती देने वाला
यह दैत्य कौन होता है?

27:36.655 --> 27:38.240
बच्चे, कोई उसका मुकाबला नहीं कर सकता।

27:39.575 --> 27:41.786
क्यों? वह भी तो एक इंसान है।

27:43.037 --> 27:44.497
वह इंसानों के बीच मौजूद ईश्वर है।

27:44.580 --> 27:47.708
ईश्वर बस एक है। और इस जंग में
वह हमारे साथ है।

27:47.792 --> 27:49.377
डेविड, तुम यहाँ क्या रहे हो?

27:49.460 --> 27:53.506
तुम लोग कितने दिनों से यहाँ खड़े होकर
उसकी बातें सुन रहे हो? वह है कौन?

27:54.340 --> 27:57.760
उसका नाम गोलायथ है। वह गाथ के
राजा अकीश के साथ है।

27:57.843 --> 27:59.637
तो तुम में से कोई भी
उसका सामना नहीं करेगा?

28:02.264 --> 28:03.474
तुम उससे लड़ना चाहते हो?

28:04.558 --> 28:06.602
हमें हमारा जांबाज़ मिल गया।
उस दैत्य से यह लड़ेगा।

28:07.520 --> 28:09.647
एलिअब। तुम्हारा भाई।

28:09.730 --> 28:12.108
-अबीनाडाब, यहाँ आओ। डेविड आया है।
-मेरा भाई।

28:13.317 --> 28:17.154
-डेविड, तुम यहाँ क्यों आए हो?
-पिताजी ने तुम्हारे लिए सामान भेजा है।

28:17.238 --> 28:20.408
सामान? सच में? मैं तुम्हें जानता हूँ।
तुम यहाँ जंग देखने आए हो।

28:20.491 --> 28:22.660
-एक भेड़िए की तरह।
-क्या? मैं ऐसे बात नहीं कर सकता?

28:22.743 --> 28:25.079
मैंने तुम्हें वहीं रहने को कहा था।
अगर पिताजी को पता चला…

28:25.162 --> 28:28.332
पिताजी ने ही मुझे यहाँ भेजा है
और वो भी अपनी दुआ देकर।

28:28.791 --> 28:32.753
और अगर उस दैत्य का सामना
तुम सब नहीं करोगे, तो मैं करूँगा।

28:32.837 --> 28:35.506
-ठीक है। इसे उकसाओ मत।
-मैं उससे लड़ूँगा।

28:35.589 --> 28:39.385
हाँ, फिर तुमने उसका सामना क्यों नहीं किया?
तुम जूडाह के सबसे बेहतरीन सैनिक हो।

28:41.554 --> 28:44.306
डेविड, तुमने उसका कद देखा है?

28:44.390 --> 28:47.309
तो क्या हुआ? तुम भूल कैसे गए?

28:48.185 --> 28:50.146
-सबके सब भूल कैसे गए?
-क्या भूल गए?

28:50.229 --> 28:51.689
परमेश्वर की महानता।

28:54.525 --> 28:55.693
इस दैत्य से मैं लड़ूँगा।

28:55.776 --> 28:58.404
-नहीं, डेविड, तुम घर जा रहे हो।
-मैं उससे लडूंगा। छोड़ो मुझे।

28:58.487 --> 29:00.322
-तुम घर जा रहे हो।
-मैं कहीं नहीं जाने वाला।

29:00.406 --> 29:01.991
-जेसी के बेटे।
-सेनापति आबनर।

29:02.283 --> 29:03.325
नहीं, तुम नहीं, एलिअब।

29:04.368 --> 29:07.121
संगीतकार लड़के, तुम अपना यंत्र लाए हो।
अच्छा है।

29:07.580 --> 29:09.915
तुम महाराज के पास जाओ।
उनके लिए बजाओ।

29:09.999 --> 29:11.083
उन्हें आराम पहुँचाओ।

29:11.417 --> 29:12.251
योआब।

29:13.127 --> 29:14.628
डेविड, तुमने उनकी बात सुनी।

29:14.712 --> 29:18.007
ज़रूरत पड़े तो ही महाराज के लिए बजाओगे।
मगर दैत्य का ज़िक्र बिल्कुल नहीं करोगे।

29:18.382 --> 29:19.341
-चलो।
-मैं लड़ूँगा।

29:22.761 --> 29:23.762
डेविड।

29:35.441 --> 29:38.277
महाराज। संगीतकार लड़का यहाँ आ चुका है।

29:40.488 --> 29:41.530
चरवाहे।

29:42.781 --> 29:44.200
ताज्जुब की बात है।

29:44.909 --> 29:46.744
तुम यहाँ मेरे लिए बजाने आए हो?

29:48.662 --> 29:49.747
मैं आपके लिए लड़ने आया हूँ।

29:49.830 --> 29:50.873
-मुझे माफ़ कर दीजिए।
-डेविड।

29:50.956 --> 29:53.334
मेरे महाराज, मेरा भाई बेवक़ूफ़ है
और कुछ भी बोलता है।

29:53.417 --> 29:55.419
-मैं उस दैत्य का सामना करूँगा।
-उसे बोलने दो।

29:59.882 --> 30:03.469
मेरे महाराज, उस दैत्य से मैं लड़ूँगा।

30:06.180 --> 30:09.600
तुम अभी बच्चे हो।
तुम उसका सामना नहीं कर पाओगे।

30:09.683 --> 30:12.770
आपके इस सेवक ने कई सालों तक
अपने पिता की भेड़ों की देखरेख की है।

30:13.687 --> 30:17.274
उस दौरान,
मैंने एक भालू और एक शेर को भी मारा है।

30:17.358 --> 30:19.026
-डेविड।
-बहुत हुआ।

30:19.985 --> 30:23.239
जब एक शेर ने मेरी भेड़ों पर हमला किया
और मुझे ललकारा,

30:23.864 --> 30:28.911
तब मैं उसके पीछे गया, उसकी दाढ़ी पकड़ी,
खंजर से वार किया और मार डाला।

30:33.457 --> 30:35.251
यह सच कह रहा है, महाराज। वाकई ऐसा किया।

30:35.793 --> 30:36.794
अबीनाडाब।

30:36.919 --> 30:39.088
-क्या? मुझे हमेशा से यकीन था।
-तुम मदद नहीं कर रहे।

30:39.213 --> 30:42.049
वह दैत्य सर्वशक्तिमान परमेश्वर की
बेइज़्ज़ती कर रहा है।

30:43.717 --> 30:46.512
और वही परमेश्वर
जिसने मुझे शेर और भालू से बचाया

30:46.595 --> 30:49.473
वही मुझे इस फ़िलिस्तीनी के वार से बचाएगा।

30:52.226 --> 30:56.522
वह दैत्य जान लेने में माहिर है।

30:56.855 --> 30:58.148
वह इसी काम के लिए बना है।

30:58.232 --> 31:02.152
मैं भी इसी काम के लिए,
इसी पल के लिए पैदा हुआ हूँ।

31:04.530 --> 31:07.658
मेरा यकीन कीजिए, महाराज।
मैं उसका ख़ात्मा कर दूँगा।

31:12.746 --> 31:14.957
तुम्हारी बातों में बड़ी सच्चाई नज़र आती है।

31:16.584 --> 31:21.880
इससे मेरे अंदर ऐसी हिम्मत उमड़ रही है
जो मैंने तबसे नहीं महसूस की…

31:27.219 --> 31:28.220
पिताजी…

31:28.971 --> 31:30.806
महाराज।

31:31.974 --> 31:33.809
-जाओ।
-ठीक है।

31:33.892 --> 31:34.768
-महाराज।
-चलो।

31:34.852 --> 31:36.353
-महाराज, मैं उसे हरा दूँगा।
-जाओ।

31:36.437 --> 31:37.771
-जाओ।
-मुझे छोड़ दो।

31:37.855 --> 31:39.565
जाओ और उस दैत्य का सामना करो।

31:47.656 --> 31:52.494
तुम उससे उसी हिम्मत के साथ लड़ना
जो तुम यहाँ अंदर लेकर आए हो।

31:52.578 --> 31:55.831
महाराज, हमें इस बारे में सोचना चाहिए।

31:55.914 --> 31:58.500
क्यों? मैंने फैसला कर लिया है।

31:59.543 --> 32:02.004
इस काम के लिए
किसी और आदमी ने हिम्मत नहीं दिखायी।

32:07.092 --> 32:08.344
मैं तुम्हें जांबाज़ चुनता हूँ।

32:10.596 --> 32:11.847
इसे मेरा कवच दे दो।

32:12.514 --> 32:14.933
ये जंग के मैदान में
राजा का कवच पहनकर जाएगा।

32:17.269 --> 32:18.187
जाओ।

32:21.106 --> 32:22.191
शुक्रिया, महाराज।

32:37.039 --> 32:39.708
ज़ेबुलन क़बीले ने तुम्हारे पिता का
साथ छोड़ दिया।

32:40.793 --> 32:44.713
और भी कबीले ऐसा करते
अगर हमारी सेना घिरी हुई नहीं होती।

32:45.547 --> 32:49.843
फिलिस्तीनियों के पास बस एक नहीं
कई सारे दैत्य हैं।

32:49.927 --> 32:51.595
और हमारे पास और सैनिक नहीं हैं।

32:51.679 --> 32:55.474
यहाँ महल की सुरक्षा के लिए
सौ से भी कम सैनिक हैं।

32:56.433 --> 32:59.687
आप पानी के एक कतरे से
आग को नहीं बुझा सकते।

33:02.231 --> 33:03.941
फिर तो नतीजा तय है।

33:06.568 --> 33:08.195
हमारी सेना हार जाएगी।

33:09.613 --> 33:12.032
और जब महाराज का पतन होगा
तो इज़राइल का भी पतन हो जाएगा।

33:13.909 --> 33:16.453
दुश्मन हमारे दरवाज़े पर होगा।

33:17.371 --> 33:18.372
और जब वो आएँगे,

33:18.455 --> 33:23.419
तो मेरी राय है कि हम उनके सामने
घुटने टेक दें और दया की भीख मांगें।

33:23.502 --> 33:25.129
नहीं, हमें वक़्त रहते निकल लेना चाहिए।

33:26.505 --> 33:31.009
मेरे कुछ नए दोस्त हैं जो उत्तरी कबीले को
साथ लाने में हमारी मदद करेंगे,

33:31.093 --> 33:32.469
ताकि फिर से इज़राइल बना सकें।

33:32.553 --> 33:34.555
मैं अपने घर को छोड़कर नहीं जाऊँगी।

33:36.140 --> 33:39.518
फिलिस्तीनी ज़रा भी रहम नहीं करेंगे।
आप तो जानती हैं।

33:40.728 --> 33:43.397
वो पवित्र धर्मग्रंथों को जला देंगे
और मेरी माँ को वेश्या बना देंगे।

33:43.480 --> 33:46.066
-उपरवाला हमारी हिफाज़त करेगा।
-जैसे मेरे पिता की की?

33:48.485 --> 33:50.154
हमें इस जगह को छोड़ना ही होगा।

33:50.237 --> 33:52.698
ताकि हम अपने तख़्त को बचा सकें।

33:53.782 --> 33:56.493
बाकी बचे कबीले को राह दिखाने वाला
कोई तो होना चाहिए।

33:58.370 --> 33:59.621
आपको मुझे राजा बनाना होगा।

34:02.541 --> 34:04.626
-हमारा पहले ही एक राजा है।
-जो हार चुका है।

34:05.169 --> 34:06.920
जंग भी और शायद अपना सिर भी।

34:09.214 --> 34:12.551
माँ, अगर हम तख़्त पर नहीं बैठते,
तो कोई और बैठ जाएगा।

34:16.138 --> 34:17.473
मुझे लगा तुम मर चुके हो।

34:21.351 --> 34:23.061
कुछ वक़्त के लिए, माँ, मैं मर ही गया था।

34:26.064 --> 34:27.316
तुम्हारे साथ क्या हुआ?

34:31.737 --> 34:34.865
बस इतना जान लीजिए कि मुझे
पुरानी ज़िंदगी के बदले नई ज़िंदगी मिली।

34:35.574 --> 34:38.660
मेरे पास अतीत की बातें करने का
वक़्त नहीं है।

34:40.120 --> 34:41.747
आप जानती हैं मैं सच बोल रहा हूँ।

34:44.208 --> 34:45.834
हमारा अपना कोई नहीं लौटकर आएगा।

34:46.919 --> 34:50.130
इस ख़ानदान में बस आप और मैं ही हैं
जो ज़िंदा बचे हैं।

34:51.131 --> 34:52.966
हम इज़राइल की इकलौती उम्मीद हैं।

34:55.511 --> 34:58.722
मैं आपका राजा और आप सभी का रक्षक बनूँगा।

35:06.688 --> 35:11.193
सब्र रखो, मेरे भाइयों। सब्र रखो।
थोड़ी देर में सब पता चल जाएगा।

35:15.739 --> 35:16.907
यह पागलपन है।

35:19.535 --> 35:21.829
-तुम कहाँ जा रहे हो?
-हथियारघर में।

35:21.912 --> 35:23.664
-मुझे तीर-कमान लेने हैं।
-किसलिए?

35:24.164 --> 35:27.042
मैं अपने भाई को ज़िंदा
चीथड़े होते हुए नहीं देखने वाला।

35:35.259 --> 35:36.218
ठीक है।

36:03.996 --> 36:05.581
तुम एक राजा के जैसे लग रहे हो।

36:08.917 --> 36:10.085
पर ऐसा महसूस नहीं हो रहा।

36:13.839 --> 36:16.842
मैं तुम्हें यह देने आई हूँ।

36:20.137 --> 36:23.599
इसमें परमेश्वर की तरफ से
जॉशुआ को कही गई बातें हैं।

36:25.517 --> 36:26.810
महान जंग से पहले,

36:26.894 --> 36:30.647
परमेश्वर ने कहा, "डरो नहीं।"

36:32.733 --> 36:35.944
"मज़बूत और हिम्मतवर बनो।"

36:39.489 --> 36:40.324
जॉशुआ।

36:41.742 --> 36:42.743
यह…

36:43.243 --> 36:47.539
"हर जगह जहाँ तुम्हारे कदम पड़ेंगे…"

36:50.334 --> 36:51.793
"वो जगह मैंने तुम्हारे नाम कर दी है।"

36:54.796 --> 36:57.883
मगर इसमें सबकुछ नहीं लिखा।

36:57.966 --> 36:59.217
इतनी जगह नहीं थी।

37:00.761 --> 37:04.014
और तुम इसे अपने साथ ले जाओ? ठीक है?

37:07.935 --> 37:08.769
लोग क्या कह रहे हैं?

37:10.729 --> 37:14.775
सच कहूँ, तो डरे हुए हैं।

37:15.609 --> 37:16.860
पर उनकी गलती नहीं है।

37:18.278 --> 37:19.988
वो लोग ये नहीं समझते…

37:22.449 --> 37:27.537
कि वो परमेश्वर, अलग चीज़ों को चुनता है।

37:28.455 --> 37:31.249
वह सताए हुओं को चुनता है,

37:31.333 --> 37:35.504
क्योंकि वह उनके दिल का हाल जानता है।

37:42.302 --> 37:44.179
और जो तुम्हारे दिल में है…

37:46.556 --> 37:49.768
वह हज़ारों तलवारों से ज़्यादा ताक़तवर है।

37:52.562 --> 37:54.106
शायद तुम सही कह रही हो।

37:59.277 --> 38:00.737
तुम्हें डर लग रहा है?

38:01.905 --> 38:02.990
बहुत ज़्यादा।

38:06.493 --> 38:07.536
मुझे भी लग रहा है।

38:09.621 --> 38:10.831
पर मुझे तुम पर यकीन है।

38:15.377 --> 38:19.756
मैं इसकी वजह नहीं जानती। बस करती हूँ।

38:22.175 --> 38:25.887
मुझे माफ़ कर दो।
माफ़ कर दो मैं छोड़कर चला गया था।

38:32.019 --> 38:33.311
एक अच्छे काम के लिए।

38:41.570 --> 38:42.654
डेविड।

38:45.574 --> 38:50.287
तुम उस दैत्य का ख़ात्मा करोगे
और मेरे पास वापस आओगे।

38:57.586 --> 38:58.837
मैं इस कवच को नहीं पहन सकता।

39:02.215 --> 39:03.425
मैं जैसा हूँ वैसे जाना चाहिए।

39:04.634 --> 39:06.178
और मुझे एक नदी ढूँढ़नी होगी।

39:13.560 --> 39:14.686
-सेनापति आबनर।
-रुक जाओ।

39:17.606 --> 39:18.440
राजकुमार जोनाथन।

39:19.691 --> 39:22.110
राजकुमार जोनाथन।
योआब, मेरी जगह सँभालो।

39:25.697 --> 39:26.823
तुम ज़िंदा हो।

39:27.908 --> 39:28.992
तुम बचकर कैसे निकले?

39:30.202 --> 39:31.328
मुझे अपना पानी दो।

39:32.120 --> 39:33.288
लो। इसे पियो।

39:41.588 --> 39:42.672
तुम बचकर कैसे निकले?

39:44.216 --> 39:45.550
अकीश के कहने पर।

39:47.302 --> 39:49.471
उसके आदमी और उसके दैत्य ने छोड़ दिया।

39:51.389 --> 39:52.474
और तुमने उसे देखा?

39:54.142 --> 39:57.020
हाँ। अपनी आँखों से।

39:58.480 --> 40:00.065
हम हर तरफ से घिर चुके हैं।

40:00.816 --> 40:02.609
बस लड़कर ही बच सकते हैं।

40:03.944 --> 40:05.237
या फिर हम हार मान लें।

40:06.780 --> 40:08.198
हम कभी हार नहीं मानेंगे।

40:14.621 --> 40:17.791
तुम्हारे पिता ने एक जांबाज़ चुना है।

40:19.209 --> 40:22.087
क्या? किसे?

40:26.133 --> 40:29.636
पीछे हो जाओ! चलो जाओ! पीछे हो जाओ!

40:30.345 --> 40:34.349
सेनापति आबनर!
यह एक भद्दा मज़ाक है! शर्म की बात है।

40:34.432 --> 40:35.267
डेविड…

40:35.350 --> 40:36.184
एक चरवाहे को?

40:36.268 --> 40:37.269
मैं नदी में जा रहा हूँ।

40:37.352 --> 40:40.605
जांबाज़ चुन लिया है? अब सच में लग रहा है
कि महाराज होश खो बैठे हैं।

40:42.023 --> 40:44.109
उन्हें अभी हमसे बात करनी होगी।

40:44.192 --> 40:45.735
उन्हें परेशान करना ठीक नहीं।

40:45.819 --> 40:49.489
वह पहले से परेशान आत्मा हैं, सेनापति आबनर।
सामने से हटो।

40:52.701 --> 40:55.620
तुम्हारी इतनी जुर्रत कि
इज़राइल के सरदारों को तलवार दिखाओ?

40:55.704 --> 40:58.206
तुम्हारी इतनी जुर्रत कि
इज़राइल के राजा को धमकाओ?

40:58.290 --> 41:01.960
वह अभी हमसे बात करेंगे
या राज करने का ओहदा खोएंगे।

41:02.043 --> 41:03.712
तुम्हें मेरा ताज चाहिए, एड्रियल?

41:06.339 --> 41:07.757
आओ मुझसे लेकर दिखाओ।

41:10.051 --> 41:11.761
वह लड़का कहाँ है?

41:59.517 --> 42:00.852
तुम क्या ढूँढ़ रहे हो?

42:03.813 --> 42:04.731
पत्थर।

42:07.150 --> 42:09.986
-सच बताओ तुम कौन हो?
-आप जानते हैं मैं कौन हूँ।

42:10.779 --> 42:11.696
सच में?

42:12.989 --> 42:14.658
तुमने मेरे पिता के लिए संगीत बजाया।

42:16.952 --> 42:18.620
अब उन्होंने तुम्हें जांबाज़ चुना है।

42:21.248 --> 42:22.123
क्यों?

42:23.250 --> 42:24.751
क्योंकि एक मैं ही उनके पास गया।

42:26.211 --> 42:27.504
तुम बेहद हिम्मतवर हो, डेविड।

42:28.338 --> 42:31.967
मगर मैंने उस दैत्य को देखा है।
तुम उसे नहीं हरा सकते।

42:35.220 --> 42:37.681
क्या मैं अकेला इंसान हूँ
जिसे पुरानी कहानियों पर यकीन है?

42:39.224 --> 42:40.934
इस शैतान ने किसे चुनौती दी है?

42:42.352 --> 42:47.732
बात उस दैत्य की ताक़त की नहीं है।
बात परमेश्वर की महानता की है।

42:50.652 --> 42:52.070
शायद परमेश्वर हमारे साथ नहीं है।

42:52.696 --> 42:56.616
वह यहाँ हमारे साथ नहीं हैं,
क्योंकि हम डर गए हैं।

42:58.076 --> 43:00.912
वो तब हमारे साथ ज़रूर होंगे
जब हम अपने डर का सामना करेंगे।

43:01.705 --> 43:02.789
तुम उसे कैसे हराओगे?

43:04.374 --> 43:07.877
तुम्हारे पास कोई हथियार नहीं है।
न लड़ना आता है।

43:15.635 --> 43:17.012
मगर तुम्हारा हौसला बुलंद है।

43:20.056 --> 43:21.141
तुम किस कबीले से हो?

43:22.851 --> 43:23.935
जूडाह कबीले से।

43:30.108 --> 43:31.276
किस शहर से?

43:32.319 --> 43:33.320
बेथलेहेम से।

43:39.951 --> 43:41.036
डेविड।

43:45.623 --> 43:47.709
क्या पैगंबर सैमुअल तुम्हारे घर आए थे?

43:57.302 --> 43:58.178
हाँ।

44:23.578 --> 44:24.537
डेविड।

44:33.505 --> 44:35.048
उस तक निशाना लगाना नामुमकिन सा है।

44:38.385 --> 44:40.762
मगर भाला फेंकने के तुरंत बाद ही
वह सबसे कमज़ोर होता है।

44:50.271 --> 44:51.689
परमेश्वर तुम्हारी मदद करे।

45:04.035 --> 45:06.871
मेरे सब्र का बाँध टूट रहा है।

45:07.414 --> 45:11.626
अगर तुम में से कोई मेरा सामना नहीं कर सकता
तो जंग के लिए खड़े क्यों हो?

45:12.210 --> 45:14.379
अपना जांबाज़ चुनो
और मुझसे मुकाबला करने भेजो।

45:17.715 --> 45:18.883
वह कहाँ है?

45:19.050 --> 45:22.595
वह दैत्य का सामना नहीं कर सकता।
यह पागलपन है।

45:22.679 --> 45:23.680
नहीं।

45:24.305 --> 45:30.603
यह राजद्रोह है।
मैंने फैसला कर दिया है। तुम उसे मानोगे।

45:33.857 --> 45:35.859
अपना जांबाज़ भेजो…

45:36.818 --> 45:37.902
रास्ते से हट जाओ।

45:39.863 --> 45:45.577
रोकिए उसे। उसे वापस बुला लीजिए।

45:45.702 --> 45:47.954
नहीं। मैं ऐसा नहीं करने वाला।

45:49.164 --> 45:52.333
-फिर मैं करूँगा।
-तुमने मुझे महाराज के लिए जान देने कहा था।

45:53.001 --> 45:55.503
मैं तैयार हूँ। क्या तुम तैयार हो?

45:58.173 --> 46:00.049
आपने हम सब को बर्बाद कर दिया।

46:13.396 --> 46:14.314
रुको।

46:17.358 --> 46:20.361
-डेविड, मेहरबानी करके ऐसा मत करो।
-तुम्हें मुझ पर शक है?

46:20.445 --> 46:22.530
मुझे है। यह नामुमकिन है।

46:23.072 --> 46:25.283
यही तो फर्क है हम में, मेरे भाई।

46:25.366 --> 46:26.367
डेविड।

46:29.621 --> 46:30.955
तुम्हें डर क्यों नहीं लग रहा?

46:31.998 --> 46:33.249
डर लग रहा है।

46:38.254 --> 46:42.008
मैं इज़राइल की सेना को चुनौती देता हूँ।

46:42.091 --> 46:45.637
मैं इज़राइल के राजा को चुनौती देता हूँ।

46:45.887 --> 46:49.557
मैं इज़राइल के परमेश्वर को चुनौती देता हूँ।

46:52.185 --> 46:53.061
गोलायथ!

46:59.192 --> 47:00.693
रास्ते से हट जाओ!

47:16.876 --> 47:18.336
ये नादान लड़का?

47:19.379 --> 47:22.048
इस तपती गर्मी का असर तो नहीं हो गया
इस बेवकूफ़ पर?

47:34.686 --> 47:35.937
परमेश्वर, मुझे सही राह दिखाओ।

47:36.896 --> 47:38.731
हर कदम पर। बस एक कदम।

47:47.949 --> 47:49.659
क्या यही तुम्हारा जांबाज़ योद्धा है?

47:51.286 --> 47:52.954
ये कोई मज़ाक है।

47:53.663 --> 47:58.167
इस गुलामों की जात ने एक बच्चे को भेजकर
मेरी बेइज़्ज़ती की है।

47:59.794 --> 48:04.966
मैंने एक जांबाज़ योद्धा भेजने को कहा था।
मैंने एक राजा भेजने को कहा था।

48:08.886 --> 48:10.471
मगर इन्होंने एक बच्चे को भेजा है।

48:12.098 --> 48:14.350
शायद उनका राजा सच में पागल हो गया है।

48:16.811 --> 48:19.063
तुम एक लाठी लेकर मेरा सामना करने चले आए?

48:20.565 --> 48:24.902
तुम्हें क्या लगता है मैं कौन हूँ?
कोई कुत्ता?

48:27.322 --> 48:28.740
अच्छा, तो यही सही, बच्चे।

48:29.115 --> 48:32.285
तुम मेरे गुस्से का शिकार बनोगे।

48:35.163 --> 48:36.372
जोनाथन।

48:37.040 --> 48:38.207
आप कहाँ थे?

48:39.167 --> 48:41.002
उसके खिलाफ़ उठी बगावत शांत करवा रहा था।

48:41.085 --> 48:45.673
मैं तुम्हारे टुकड़े-टुकड़े करके
चील-कौओं को

48:46.090 --> 48:48.259
और धरती के जानवरों को खिलाऊँगा।

48:49.010 --> 48:52.013
अगर उसने उसे हरा दिया, तो मेरे पीछे आना।

48:55.808 --> 48:57.101
मुझे एक घोड़ा लाकर दो।

49:01.189 --> 49:05.401
तुम मेरे सामने तलवार,
भाले और बरछी लेकर आए हो।

49:06.402 --> 49:08.988
पर मैं तुम्हारे सामने
सर्वशक्तिमान परमेश्वर का नाम लेकर आया हूँ,

49:09.322 --> 49:13.618
इज़राइल की सेनाओं के परमेश्वर का,
जिसका तुमने अनादर किया है।

49:16.079 --> 49:19.374
आज, परमेश्वर तुम्हें
मेरे हाथों में सौंप देंगे,

49:20.375 --> 49:23.544
और मैं तुम्हें अपना निशाना बनाऊँगा
और तुम्हारा सिर धड़ से अलग कर दूँगा।

49:29.258 --> 49:33.346
आज, मैं फिलिस्तीनी खेमे की लाशें
आसमान के परिंदों

49:33.429 --> 49:36.724
और धरती के जानवरों को खिलाऊँगा।

49:37.350 --> 49:40.645
ताकि सारे जहाँ को यह पता लग जाए
कि इज़राइल का एक परमेश्वर है।

49:41.312 --> 49:44.232
और तब, ये सभी लोग जान जाएंगे

49:44.315 --> 49:46.651
कि वह परमेश्वर तलवारों और भालों के दम पर
हमें जीत नहीं देते,

49:46.818 --> 49:52.573
ये जंग ही उस परमेश्वर की है,
और वह तुम्हें हमारे हाथों मौत देगा।

49:55.952 --> 49:58.371
तुम मेरे करीब आने के भी काबिल नहीं हो।

50:21.144 --> 50:22.353
मुझे एक और दो।

50:32.405 --> 50:33.406
दूसरा लाओ।

50:51.841 --> 50:52.675
नहीं।

51:23.456 --> 51:27.835
देखा?
तुम मेरे करीब आने के भी काबिल नहीं हो।

51:43.017 --> 51:45.436
मैं तुम्हें उसके हाथों
मरने नहीं दूँगा, मेरे भाई।

51:48.272 --> 51:49.273
मुझे माफ़ करना।

51:53.402 --> 51:54.487
अकीश।

52:32.316 --> 52:34.694
तुम्हारे अन्दर मूसा का साहस…

52:37.572 --> 52:39.282
और सैमसन की शक्ति भर जाए।

53:21.949 --> 53:25.286
उठो। उठ जाओ, डेविड।

53:50.019 --> 53:51.228
मेरी माँ के लिए।

55:32.580 --> 55:35.833
सैनिकों, मेरा घोड़ा और कवच लाओ।

55:38.044 --> 55:39.086
जल्दी।

56:10.743 --> 56:12.369
मेरे साथ लड़ो!

56:18.459 --> 56:19.835
महाराज के लिए!

56:24.215 --> 56:25.341
डेविड!

56:27.009 --> 56:31.222
परमेश्वर और इज़राइल के लिए।

56:33.516 --> 56:37.895
तब परमेश्वर ने येशुआ से कहा,
"मज़बूत और हिम्मतवर बनो।"

56:38.312 --> 56:42.525
"इन लोगों को जॉर्डन के पार उस जगह ले चलो
जहाँ मैं तुम्हें दिखाऊँगा।"

56:43.150 --> 56:46.237
"सारी ज़िंदगी
कोई भी तुम्हारे खिलाफ़ नहीं उठ पाएगा।"

56:46.946 --> 56:49.615
"जिस तरह मैंने मूसा का साथ दिया,
तुम्हारा भी साथ दूँगा।"

56:52.952 --> 56:55.955
मैं न तुम्हें छोड़ूँगा
और न ही तुम्हें दूर करूँगा।

56:56.580 --> 56:59.333
रुको! रुक जाओ!

57:00.501 --> 57:01.752
"डरो नहीं,

57:02.962 --> 57:08.092
"क्योंकि जहाँ भी तुम जाओगे
तुम्हारा परमेश्वर तुम्हारे साथ होगा।"

57:09.510 --> 57:15.141
और इसलिए, मैं तुम्हारे पिता की जगह
तुम्हारी ताजपोशी करता हूँ।

57:15.266 --> 57:17.726
इज़राइल के राजा के तौर पर।

57:24.108 --> 57:25.359
हमला करो!

59:36.490 --> 59:38.492
संवाद अनुवादक महताब आलम

59:38.575 --> 59:40.577
रचनात्मक पर्यवेक्षक दिनेश शाकुल
