WEBVTT

00:04.463 --> 00:06.549
हाउस ऑफ़ डेविड में अब तक…

00:06.632 --> 00:11.303
बहादुरी के इनाम के तौर पर, मैं तुम्हें
एक हज़ार सैनिकों का सेनापति बनाता हूँ!

00:11.387 --> 00:12.888
डेविड!

00:15.891 --> 00:16.851
हम काबिल हैं।

00:16.934 --> 00:17.977
हमेशा से थे।

00:18.060 --> 00:21.272
और अगर तुम सच में
ऐसा मानती हो, तो तुम क्या माँगोगी?

00:21.814 --> 00:25.818
मैं अपनी प्यारी बेटी का हाथ
तुम्हारे हाथ में देना चाहता हूँ।

00:25.901 --> 00:26.944
मीराब।

00:28.112 --> 00:29.530
तुम मेरी बेटी की इज़्ज़त से खेले!

00:29.613 --> 00:33.325
-क्या तुमने उसकी बेटी को अपवित्र किया?
-मतलब, हो सकता है।

00:33.409 --> 00:34.493
उसे निष्कासित करती हूँ।

00:34.577 --> 00:36.704
मेरा बेटा अपना कर्ज़ अदा किए बिना
नहीं लौट सकता।

00:37.288 --> 00:39.373
मैं काले जादू का इस्तेमाल करूँगी।

00:39.457 --> 00:40.708
वह क़ानून नहीं बदलेंगे।

00:40.791 --> 00:42.418
शायद आपको बदलना पड़े।

00:42.501 --> 00:45.337
आप और मैं हमारे वंश के
इकलौते दो लोग हैं जो जीवित बचेंगे।

00:45.421 --> 00:47.006
आपको मुझे राजा बनाना होगा।

00:47.089 --> 00:49.717
-अभी के लिए इसे हमारे बीच रखना।
-हमें यह विवश होकर करना पड़ा।

00:49.800 --> 00:52.678
-महान दूरदृष्टा।
-जेसी के परिवार को पैग़ाम भेजकर बुलाओ।

00:52.762 --> 00:56.015
जो मैं जानता हूँ, उसकी कीमत तो
सोने के सिक्कों से भी बढ़कर है।

00:58.225 --> 00:59.185
ए!

01:09.904 --> 01:11.655
मैं एक सवाल के साथ शुरुआत करूँगा…

01:13.199 --> 01:17.787
क्या इंसान बदल सकते हैं?
क्या वे अपनी फ़ितरत से ऊपर उठ सकते हैं?

01:19.079 --> 01:23.334
ज़िंदगी ने मुझे सिखाया है
कि हमें आग की कसौटी से गुज़रना होता है।

01:25.878 --> 01:28.714
पीड़ा और यातना हमें बदल देती हैं।

01:30.174 --> 01:32.051
मैं आपको अपनी कहानी बताता हूँ।

01:38.349 --> 01:39.809
तुम एश्बाल हो।

01:40.643 --> 01:42.102
इज़राइल के राजकुमार।

01:42.728 --> 01:45.397
जिसे अपने ही परिवार ने
राज्य से निष्कासित करके एनडोर भेज दिया।

01:45.481 --> 01:46.398
है न?

01:47.358 --> 01:48.400
हाँ।

01:49.485 --> 01:50.319
अच्छी बात है।

01:57.868 --> 01:58.953
क्या तुम आ रहे हो?

02:28.482 --> 02:31.068
अगर तुम मेरी फ़िरौती लेना चाहते हो,
तो एक बुरी ख़बर है।

02:32.027 --> 02:34.113
मेरे पिता की नज़रों में
मेरी कोई कीमत नहीं है।

02:34.780 --> 02:38.742
शायद मैं तुम्हारी कीमत
उनसे कहीं ज़्यादा समझ सकता हूँ।

02:40.286 --> 02:41.745
चलो भी, दोस्त।

02:41.829 --> 02:43.914
हमें एक-दूसरे से
बैर रखने की ज़रूरत नहीं है।

02:45.082 --> 02:48.460
मैं न तो तुम्हारा दोस्त हूँ,
न ही तुम्हारे ख़ुदा का।

02:50.462 --> 02:53.090
तुम वक़्त के साथ सीख जाओगे।

03:06.020 --> 03:08.856
जैसा कहा जाए वैसा करो,
तो चाबुक की मार से बच जाओगे।

03:12.443 --> 03:14.028
यह कोई छल नहीं है।

03:15.195 --> 03:16.363
जितना चाहो खा सकते हो।

03:27.666 --> 03:29.168
मुझे बताओ, राजकुमार।

03:29.668 --> 03:32.880
तुमने कभी हाथी देखा है?

03:35.633 --> 03:36.842
तुम्हें मुझसे क्या चाहिए?

03:37.635 --> 03:40.471
विशाल और बेहद शक्तिशाली जीव होते हैं।

03:41.555 --> 03:43.307
लेकिन उन्हें वश में करना आसान होता है।

03:44.183 --> 03:45.184
जब वे छोटे होते हैं,

03:45.267 --> 03:48.896
तो आपको बस उन्हें
एक रस्सी से एक खंभे से बाँधना होता है।

03:49.647 --> 03:53.984
चाहे वे जितनी भी कोशिश करें,
वे उस बंधन को तोड़ नहीं पाते।

03:54.485 --> 03:56.654
वे विरोध करते हैं, वे लड़ते हैं।

03:57.154 --> 04:00.032
लेकिन वक़्त बीतने के साथ,
वे हार मान लेते हैं।

04:04.203 --> 04:09.291
एक बार बड़े होने पर,
वह विशालकाय जानवर एक पतली सी डोरी से

04:09.375 --> 04:11.335
उसी खंभे से बाँधा जा सकता है।

04:13.796 --> 04:19.468
क्योंकि वह ख़ुद के बारे में वह सोचता है
जो उसे सोचना सिखाया गया है।

04:21.053 --> 04:26.308
असली ताक़त दिमाग में होती है,
देह में नहीं।

04:29.228 --> 04:31.981
तुम्हें मुझसे क्या चाहिए?

04:33.190 --> 04:37.027
तुम तब तक दर्द झेलते रहोगे
जब तक ख़ुद को सच में समझ नहीं जाते।

04:50.749 --> 04:51.667
अब और नहीं।

04:53.460 --> 04:54.294
मैं कुछ भी करूँगा।

04:58.382 --> 04:59.216
रहम करो।

05:08.517 --> 05:10.519
इसकी बेड़ियाँ खोल दो।

05:10.602 --> 05:12.771
अब इससे कोई ख़तरा नहीं है।

05:20.946 --> 05:22.072
बैठ जाओ।

05:29.329 --> 05:30.164
पियो।

05:51.727 --> 05:53.228
मुझ पर अब रहम क्यों दिखा रहे हो?

05:56.857 --> 05:58.817
एश्बाल, हाथी की तरह

06:00.819 --> 06:04.656
तुमने भी उस रस्सी से
लड़ना छोड़ दिया, जो तुम्हें रोके हुए थी।

06:06.116 --> 06:07.868
तुम आज्ञाकारी बन गए,

06:08.494 --> 06:13.207
और तुमने अपने से कमज़ोर लोगों को
तुम्हारी किस्मत तय करने का हक़ दे दिया।

06:13.957 --> 06:15.125
लेकिन अब…

06:18.045 --> 06:22.216
अब वक़्त आ गया है कि तुम अपना रास्ता चुनो।

06:24.510 --> 06:27.387
अपने लिए ख़ुद फ़ैसले लो।

06:30.099 --> 06:33.393
मैं अपने पिता, किश के पुत्र,
राजा सॉल के वंश का वफ़ादार हूँ।

06:34.144 --> 06:35.604
मैं किसी का ग़ुलाम नहीं हूँ।

06:41.985 --> 06:43.153
मैं टूटा नहीं, पिताजी।

06:44.738 --> 06:48.283
मैंने अपने बंधकों को मार डाला,
दूसरे क़ैदियों को आज़ाद किया

06:49.368 --> 06:50.744
और मिलकर, हम वहाँ से भाग निकले।

06:53.539 --> 06:55.249
यह काफ़ी दमदार कहानी है, एश्बाल।

06:57.376 --> 06:59.211
मैंने आग की कसौटी पार कर ली, पिताजी।

07:00.879 --> 07:02.464
क्या मैं आपको अलग नहीं लग रहा हूँ?

07:03.549 --> 07:07.052
एक इंसान अपनी काबिलियत
अपनी करनी से साबित करता है, कथनी से नहीं।

07:08.887 --> 07:13.016
तो मुझे सच कबूल करके
आपका भरोसा जीतने की इजाज़त दीजिए।

07:15.310 --> 07:18.772
आपके विजयी होकर लौटने से पहले
माँ ने मुझे राजा बनाया था।

07:19.273 --> 07:21.275
हमें लगा कि आपको हराकर
आपकी हत्या कर दी गई है,

07:21.942 --> 07:24.611
और किसी को ज़िम्मेदारी उठाकर
बची हुई प्रजा का नेतृत्व करना होगा,

07:24.695 --> 07:25.696
तो मैंने वही किया।

07:26.280 --> 07:28.991
-तुमने मौके का फ़ायदा उठाया।
-अपनी रानी और आपकी विरासत को बचाने के लिए।

07:29.074 --> 07:32.744
और उसके बावजूद आज तक
तुममें से किसी ने इसका ज़िक्र नहीं किया।

07:34.913 --> 07:38.458
तुम्हें लगता है मुझे तुम्हारी ताजपोशी की
अफ़वाहें नहीं सुनाई दी होंगी?

07:40.586 --> 07:43.589
ऐसा कोई राज़ नहीं है
जो समय के साथ खुल नहीं जाता, एश्बाल।

07:46.800 --> 07:48.260
माँ आपको कुछ समय बाद बता देतीं।

07:50.971 --> 07:52.431
लेकिन मैं आपको अभी बता रहा हूँ।

07:53.515 --> 07:56.727
मैंने अपनी ज़िंदगी में अपने अंदाज़े से
कहीं ज़्यादा गलतियाँ की हैं,

07:57.227 --> 08:00.189
पर मैं आपसे वादा करता हूँ,
मैं उन सबका प्रायश्चित करना चाहता हूँ।

08:01.773 --> 08:02.941
कैसे?

08:04.860 --> 08:08.030
मैंने जिस लड़की की मर्यादा भंग की थी
और जिसके कारण निर्वासित हुआ…

08:09.740 --> 08:10.741
मूसा के नियम के अनुसार…

08:12.201 --> 08:13.911
मैं उससे शादी करूँगा।

08:14.494 --> 08:17.247
हमारे खानदान और राज्य पर
जो भार है उसे कम करूँगा,

08:17.831 --> 08:18.916
सब आपके गौरव के लिए,

08:20.584 --> 08:21.418
महाराज।

08:28.133 --> 08:35.098
हाउस ऑफ़ डेविड

08:40.187 --> 08:42.189
गिबियाह का किला - इज़राइल की नई राजधानी

08:42.272 --> 08:43.148
डेविड?

08:43.899 --> 08:44.816
डेविड।

08:47.527 --> 08:48.362
मुझे माफ़ कर दो।

08:51.573 --> 08:53.325
मुझे नहीं पता उन्होंने ऐसा क्यों किया।

08:53.408 --> 08:54.618
मेरे पिता, वह बस…

08:54.701 --> 08:55.786
मैं जानता हूँ।

08:56.995 --> 08:58.538
समझ में नहीं आ रहा कि अब क्या करूँ।

08:59.456 --> 09:01.750
मैं जानता हूँ। पर हम हार नहीं मान सकते।

09:06.713 --> 09:07.589
तुम क्या पढ़ रहे हो?

09:08.674 --> 09:09.716
जोज़ेफ़ की कहानी।

09:10.926 --> 09:12.010
मेरी मनपसंद कहानी है।

09:13.387 --> 09:14.846
क्या तुम मुझे पढ़कर सुनाओगे?

09:14.930 --> 09:17.224
हाँ।

09:21.478 --> 09:22.688
"फिर जोज़ेफ़ ने उनसे कहा,

09:23.188 --> 09:24.523
"'डरो मत।

09:27.859 --> 09:29.236
"क्या मैं ईश्वर के स्थान में हूँ?

09:30.445 --> 09:31.947
"तुमने मुझे हानि पहुँचाने की कोशिश की।

09:33.532 --> 09:35.242
"पर परमात्मा ने सही के लिए
उसका उपयोग किया।'"

09:36.034 --> 09:38.120
"'वह हासिल करने के लिए जो अब हो रहा है।'"

09:41.748 --> 09:42.582
बहुत ख़ूबसूरत है।

09:43.292 --> 09:46.128
ये शब्द सुनकर मेरी उम्मीद जाग रही है।

09:48.255 --> 09:49.131
उम्मीद…

09:50.716 --> 09:52.592
अभी उसका दामन थामने की बहुत ज़रूरत है।

09:53.427 --> 09:55.387
-क्या तुमने मीराब से बात की?
-अभी तक नहीं।

09:56.096 --> 09:58.015
मुझे पिताजी से बात करनी होगी,

09:59.016 --> 10:01.893
पर मैं अच्छे से जानती हूँ
कि उसका नतीजा क्या होगा।

10:03.020 --> 10:04.187
तो मुझे उनसे बात करने दो।

10:05.188 --> 10:09.651
तुम उन्हें उतने अच्छे से नहीं जानते जितना
कि मैं जानती हूँ, डेविड। वह ज़िद्दी हैं।

10:10.235 --> 10:11.236
किसी की नहीं सुनते।

10:13.822 --> 10:16.366
यह इतना मुश्किल क्यों है?

10:17.617 --> 10:19.411
नहीं। हम कोई न कोई रास्ता निकाल लेंगे।

10:19.494 --> 10:22.831
ऐसा लग रहा है मानो पूरी दुनिया
हमारे खिलाफ़ साज़िश रच रही हो।

10:23.415 --> 10:26.335
और हमें लगातार बहाव के
उल्टी तरफ़ धकेल रही हो।

10:26.835 --> 10:27.836
ए।

10:28.628 --> 10:30.881
तो हम भी तैरना जारी रखेंगे।

10:32.674 --> 10:35.802
या उससे भी बेहतर,
हम नदी के बहाव का रुख ही बदल देंगे।

10:37.095 --> 10:40.682
मीखाल, परमात्मा ने
एक दैत्य को हराने में मेरी सहायता की थी।

10:41.933 --> 10:43.810
वह तुम्हारे पिता को
मनाने में मेरी मदद करेंगे।

10:46.646 --> 10:50.901
मेरे पिताजी इतनी आसानी से नहीं मानने वाले।

10:52.944 --> 10:54.112
क्या ख़बर लाए हो, आबनर?

10:54.196 --> 10:55.781
सैमुअल शहर से भाग गया है।

10:55.864 --> 10:58.116
शहर की दीवारें पार करने में
किसी ने उसकी मदद की होगी।

10:58.200 --> 10:59.534
हमने सैमुअल को बंदी बनाया था?

11:00.243 --> 11:03.538
हाँ, उसे पुराने दिनों की
याद दिलाने के लिए।

11:03.622 --> 11:05.248
मेरे खोजी उसे ढूँढ़ रहे हैं।

11:06.124 --> 11:08.126
अगर और कुछ खुलेआम किया
तो उसका नतीजा भुगतना पड़ेगा।

11:08.210 --> 11:09.503
लोग उसकी पूजा करते हैं।

11:09.586 --> 11:10.587
मैं भी।

11:11.171 --> 11:14.132
वह धोखेबाज़ साँप घास में छिपकर
सही समय आने की प्रतीक्षा करेगा।

11:14.216 --> 11:15.926
यकीनन, वह टैबनैकल में ज़रूर आएगा।

11:16.009 --> 11:17.761
और वहाँ उसे मेरी अँगूठी चूमनी पड़ेगी।

11:18.345 --> 11:19.513
अगर उसने इनकार कर दिया?

11:20.514 --> 11:21.598
नहीं।

11:21.681 --> 11:24.101
आप सैमुअल को चोट नहीं पहुँचा सकते, पिताजी।

11:24.184 --> 11:25.811
लोग बग़ावत पर उतर आएँगे।

11:26.812 --> 11:27.687
महाराज।

11:27.771 --> 11:29.189
अभी सही वक़्त नहीं है, डेविड।

11:29.272 --> 11:30.482
किस बात से परेशान हो? आओ।

11:31.608 --> 11:32.734
एक बहुत बड़ी भूल हुई है।

11:35.445 --> 11:39.449
मैं मीराब से शादी नहीं कर सकता,
क्योंकि मैं मीखाल से प्यार करता हूँ।

11:40.784 --> 11:42.285
उसकी इच्छा है कि हम साथ रहें।

11:42.369 --> 11:43.703
उसकी इच्छा ज़रूर मायने रखती होगी।

11:43.787 --> 11:45.997
-और फिर मेरी पसंद…
-"पसंद"?

11:46.081 --> 11:47.290
तुम्हें अभी चले जाना चाहिए।

11:47.374 --> 11:48.208
नहीं, आबनर।

11:48.291 --> 11:50.293
तुम्हें पसंद के बारे में कुछ बताता हूँ।

11:51.545 --> 11:55.173
मेरे हुकुम पर आदमी जंग पर जाते हैं
और मौत को गले लगाते हैं।

11:55.757 --> 11:58.510
मैं अपने लोगों का पेट भरता हूँ,
वरना लोग भूखे रहते हैं।

11:58.593 --> 12:04.099
वे आज़ाद होकर जीते हैं या फिर ग़ुलाम बनकर,
क्योंकि मैं इनमें से एक चुनता हूँ।

12:04.599 --> 12:08.186
कोई भी मेरे फ़ैसलों के
तर्क पर सवाल नहीं उठाता।

12:08.687 --> 12:10.397
तुम्हें यह हक़ किसने दिया?

12:11.982 --> 12:14.443
मैं बस आपसे एक बार फिर से
सोचने की विनती कर रहा हूँ।

12:14.526 --> 12:15.819
"फिर से सोचने की"?

12:15.902 --> 12:18.864
अच्छा, बहुत हुआ।

12:20.407 --> 12:23.493
महाराज की कृपादृष्टि का सौभाग्य
सबको नहीं मिलता है।

12:24.828 --> 12:26.037
बेहतर होगा कि फ़ायदा न उठाओ।

12:27.497 --> 12:28.582
यहाँ से जाओ।

12:38.341 --> 12:40.260
क्या हो गया है उन्हें?
वह ऐसा क्यों कर रहे हैं?

12:40.343 --> 12:43.096
तुम जानती हो वह कैसे हैं।
यकीनन उनकी अपनी कोई वजह रही होगी।

12:43.180 --> 12:46.808
कैसी वजह? डेविड मुझसे
प्यार करता है और मैं उससे प्यार करती हूँ।

12:46.892 --> 12:48.268
पिताजी यह बात जानते हैं।

12:48.894 --> 12:51.855
इसकी कोई तुक नहीं है कि वह
डेविड की शादी तुमसे करवाना चाहेंगे।

12:53.940 --> 12:54.774
हमें जाना चाहिए।

12:54.858 --> 12:57.861
हमें एक साथ जाकर उनसे बात करनी चाहिए।

12:57.944 --> 12:59.738
हम उन्हें मना सकते हैं, उन्हें सोचने पर…

12:59.821 --> 13:01.114
तुम सफ़ाई करना बंद करोगी?

13:03.700 --> 13:06.203
-पिताजी अपना मन बना चुके हैं।
-नहीं।

13:06.286 --> 13:08.580
और मैं बड़ी बहन हूँ,
तो यह फ़ैसला बेतुका नहीं है।

13:09.206 --> 13:10.040
मीराब।

13:10.665 --> 13:13.960
शायद पिताजी को लगता है
कि तुम डेविड के लिए बहुत नर्मदिल हो,

13:14.044 --> 13:15.712
उसे जो ज़िम्मेदारी संभालनी है उसके लिए।

13:17.130 --> 13:19.549
-"नर्मदिल"?
-नहीं। नाराज़ मत होना।

13:19.633 --> 13:21.176
मैं तुम्हारी बुराई नहीं कर रही।

13:22.219 --> 13:23.887
यकीनन तुम भी मेरी बुराई नहीं कर रही थीं।

13:25.013 --> 13:25.847
सही कहा।

13:36.858 --> 13:39.277
मैं मीराब से शादी नहीं कर सकता।
मैं ऐसा नहीं करूँगा।

13:40.612 --> 13:41.780
डेविड।

13:41.863 --> 13:43.698
तुम निराशा में ध्यान भटकने नहीं दे सकते।

13:49.079 --> 13:50.789
देखा? तुम्हारा ध्यान भटका था!

13:57.587 --> 13:58.922
तुम हमारे नए सेनापति हो।

13:59.506 --> 14:00.757
मैं डेविड हूँ।

14:00.840 --> 14:04.678
हाँ, मैं जानता हूँ तुम कौन हो। तुम्हारे
नेतृत्व में सेवा करना मेरा सौभाग्य है।

14:06.846 --> 14:07.806
यूराया।

14:09.057 --> 14:10.016
यूराया।

14:10.517 --> 14:13.061
और मैं ऑज़ हूँ।

14:13.645 --> 14:15.522
ऑज़। तुम दोनों से मिलकर ख़ुशी हुई।

14:16.314 --> 14:17.899
मदद के लिए शुक्रिया, यूराया।

14:17.983 --> 14:19.317
तुम सबके पास काम नहीं हैं?

14:20.819 --> 14:21.987
मेरे राजकुमार।

14:24.573 --> 14:26.241
-तुममें सुधार आया है।
-सच?

14:27.409 --> 14:28.243
नहीं।

14:29.119 --> 14:33.039
जब मैंने सीखना शुरू किया था तो मैं भी
कई बार निहत्था और अपमानित किया गया था।

14:33.123 --> 14:36.167
हाँ। जब तुम छोटे बच्चे थे। सेनापति नहीं।

14:36.960 --> 14:38.461
हम सब में बेहतर बनने का हुनर होता है।

14:42.132 --> 14:43.133
अपनी तलवार उठाओ।

14:45.260 --> 14:46.386
बाज़ुओं को कम घुमाओ।

14:46.469 --> 14:47.512
पैरों को ज़्यादा चलाओ।

14:48.972 --> 14:49.806
संतुलन।

14:50.599 --> 14:51.433
देखा?

14:53.810 --> 14:55.604
एक सैनिक में बस शारीरिक बल नहीं होता।

14:56.646 --> 14:57.689
उसमें कौशल भी होता है।

14:59.107 --> 15:00.108
अब तुम कोशिश करो।

15:02.235 --> 15:04.487
खुद को नीचे रखो, पैरों में हल्कापन रखो।

15:05.572 --> 15:06.656
आत्मविश्वास के साथ।

15:07.240 --> 15:08.908
खुद पर भरोसा रखो कि तुम इसके हक़दार हो।

15:08.992 --> 15:10.994
मेरे पिता ने मुझे बहुत पहले यह सीख दी थी,

15:12.579 --> 15:14.914
एक नेता को विश्वास करना होता है
कि वह भी उस मिट्टी का बना है।

15:15.498 --> 15:17.417
अब चाहे वह आम मिट्टी का बना हो या ख़ास,

15:18.501 --> 15:20.211
एक राजा उनमें से
किसी से भी गढ़ा जा सकता है।

15:25.550 --> 15:28.470
-रुकने को किसने कहा? करते रहो। दोबारा।
-अच्छा।

15:28.553 --> 15:30.430
हाँ, उसे बहने दो।

15:31.514 --> 15:33.600
पुट्ठे से बल लगाओ। मज़बूती से।

15:34.768 --> 15:35.644
चलो।

15:36.853 --> 15:37.812
फिर से।

15:37.896 --> 15:38.855
संतुलन।

15:50.992 --> 15:51.826
तुम तैयार हो?

15:54.996 --> 15:55.830
यह बेहतर था।

16:03.171 --> 16:05.131
हमेशा तलवार की नोंक
दुश्मन की तरफ़ रखो। शाबाश।

16:08.093 --> 16:10.845
और उसी पाँव से आगे बढ़ो।
तलवार नीचे की ओर घुमाओ।

16:28.738 --> 16:29.572
शाबाश।

16:42.502 --> 16:44.087
उस लड़के में कुदरती हुनर है,

16:45.130 --> 16:46.631
एक सूरमा बनने की काबिलियत है।

16:46.715 --> 16:50.301
हाँ, पर अगर उसका हुनर ज़्यादा दमकने लगा,

16:50.385 --> 16:53.430
तो कहीं राजा भी
उसकी चकाचौंध में अंधे न हो जाएँ।

16:54.681 --> 16:56.015
मुझे पता है मैं क्या कर रहा हूँ।

16:58.727 --> 17:02.188
और उसके बावजूद तुमने हमारे घर में
आफ़त बुलाई, हमारी बेटियों में फूट डालकर।

17:04.441 --> 17:08.403
तुमने मुझसे पहले बात किए बिना
ऐसा फ़ैसला क्यों लिया?

17:10.947 --> 17:11.823
तुम सही कह रही हो।

17:13.908 --> 17:15.952
प्यार में भरोसा और ईमानदारी ज़रूरी है।

17:16.786 --> 17:20.832
एक शौहर और उसकी बीवी को
उनके बीच कोई राज़ नहीं रखने चाहिए।

17:22.709 --> 17:23.626
तुम इससे सहमत हो?

17:29.799 --> 17:30.675
तुम्हें किसने बताया?

17:33.094 --> 17:34.095
उससे क्या फ़र्क पड़ता है?

17:34.846 --> 17:38.391
सही वक़्त आने पर
तुम्हें ख़ुद बताने का मेरा इरादा था।

17:39.184 --> 17:40.393
फिर भी, तुमने नहीं बताया।

17:43.062 --> 17:45.899
मैं समझता हूँ कि तुमने वही किया
जो उस वक़्त ज़रूरी लगा होगा।

17:52.489 --> 17:56.534
लेकिन मान लो, तुमने मेरी मौत का शोक
कुछ ज़्यादा ही जल्दी मना लिया।

17:58.787 --> 18:00.538
दुआ करती हूँ ऐसी नौबत फिर कभी न आए।

18:14.385 --> 18:15.220
और मेरी जान…

18:19.015 --> 18:20.433
फिर कभी मुझसे झूठ भी मत बोलना।

18:29.859 --> 18:31.361
माल-असबाब में कमी आई है…

18:32.779 --> 18:34.531
हम यह बातचीत कभी और जारी रखेंगे।

18:36.658 --> 18:38.785
-हमें कुछ दिनों का समय दो।
-जी।

18:41.329 --> 18:42.580
आपने हमें बुलाया, पिताजी?

18:42.664 --> 18:44.666
ऐसे कई मसले हैं जिन्हें हमें सुलझाना है।

18:44.749 --> 18:46.626
जिनमें सबसे अहम है एश्बाल की वापसी।

18:47.669 --> 18:49.587
तो हम याहिर के साथ
इस झगड़े को कैसे सुलझाएँगे?

18:49.671 --> 18:53.049
एश्बाल डैन के याहिर की बेटी,
दीनाह से ब्याह करेगा।

18:55.927 --> 18:57.053
यह मेरा फ़ैसला था।

18:57.136 --> 19:00.181
मूसा के नियम का पालन होगा।

19:00.265 --> 19:02.392
इसके नतीजतन राज्य और भी मज़बूत होगा।

19:03.560 --> 19:06.479
तुम और तुम्हारे सैनिक समझौते के लिए
तुम्हारे भाई के साथ जाएँगे।

19:06.563 --> 19:08.439
अक्लमंदी दिखाना और इज़्ज़त से पेश आना।

19:09.023 --> 19:11.067
याहिर को साबित करना
कि हम उसे गंभीरता से लेते हैं।

19:12.443 --> 19:13.361
डेविड आगे होना चाहिए।

19:15.697 --> 19:17.198
हाँ। इसे सिखाओ।

19:18.199 --> 19:20.201
एक नेता और अगुआ बस एक योद्धा नहीं होता।

19:21.160 --> 19:23.788
तुम्हें शांति बनाए रखने का
हुनर भी आना चाहिए।

19:24.914 --> 19:25.748
शुक्रिया, महाराज।

19:27.792 --> 19:28.877
आदेश दे दिए गए हैं।

19:35.383 --> 19:37.051
तुम वाकई उससे शादी करोगे?

19:37.719 --> 19:39.429
तुमने कहा था कि उसका कूबड़ निकला है।

19:40.096 --> 19:42.348
सच कहूँ तो, मुझे याद नहीं है।

19:46.477 --> 19:48.104
आपने सब कुछ ले लिया?

19:48.688 --> 19:49.772
सलामत रहना।

19:57.739 --> 19:59.741
उस पर थोड़ी और कड़ी नज़र रखो।

20:04.203 --> 20:05.997
तुम्हारे सफ़र के लिए शुभकामनाएँ।

20:06.748 --> 20:09.959
जब तुम लौटोगे, तो हम
इंतज़ाम करने शुरू कर देंगे।

20:11.127 --> 20:13.796
हमसे पहले एश्बाल की शादी
हम नहीं होने सकते, है न?

20:15.965 --> 20:16.966
मुझे चलना चाहिए।

20:25.308 --> 20:26.225
सलाम।

20:43.201 --> 20:44.202
मेरी रानी।

20:48.539 --> 20:49.791
मेरी सहेली।

20:49.874 --> 20:52.335
महाराज वापस लौट आए हैं।

20:54.629 --> 20:58.633
अब समय आ गया है कि जादू-टोना और
जंतर-मंतर वापस अंधेरे के साये में छिप जाए।

21:02.929 --> 21:06.516
मुझे खेद है कि अब तुम्हारा
गिबियाह में होना ख़तरे से खाली नहीं है।

21:07.475 --> 21:10.144
-तो मुझे राज्य से निकाला जा रहा है।
-नहीं।

21:10.228 --> 21:12.271
नहीं, यह कोई सज़ा नहीं है।

21:13.272 --> 21:14.565
हम दोनों की हिफ़ाज़त कर रही हूँ।

21:16.859 --> 21:18.861
मैं तुम्हारी बहुत आभारी हूँ।

21:20.571 --> 21:21.698
तुम्हारी दोस्ती के लिए…

21:23.408 --> 21:24.325
और समझदारी के लिए।

21:28.246 --> 21:29.622
अगर दोबारा कभी मेरी ज़रूरत पड़े…

21:31.874 --> 21:32.792
तुम्हें ढूँढ़ लूँगी।

23:05.468 --> 23:06.761
इस कमरे की सफ़ाई हो चुकी थी।

23:07.720 --> 23:09.806
सर्राफ़ ने आपका हार ठीक कर दिया।

23:10.431 --> 23:11.682
मैं इसे वापस रखने आई थी।

23:14.685 --> 23:16.270
तुम्हारा काम है राजकुमारियों की देखभाल।

23:16.354 --> 23:17.605
उस काम पर ध्यान दो।

23:17.688 --> 23:18.564
जी, रानी साहिबा।

23:24.821 --> 23:27.990
उम्मीद है हर कोने की जाँच करके
देख लिया होगा कि कहीं बिच्छू न हों।

23:28.658 --> 23:30.618
बिच्छू, रानी साहिबा?

23:31.410 --> 23:32.370
हाँ।

23:32.453 --> 23:34.330
वे बड़े मायावी जीव होते हैं।

23:35.581 --> 23:37.834
छोटी से छोटी दरार से
रेंगते हुए निकल आते हैं,

23:38.793 --> 23:41.379
इस आशा में कि उनके शिकार को
भनक भी नहीं लगी होगी।

23:42.380 --> 23:44.298
हमें एहतियात बरतकर उन्हें मार डालना चाहिए,

23:45.591 --> 23:47.009
इससे पहले कि वे कोई नुकसान पहुँचाएँ।

23:50.096 --> 23:51.264
मुझे दर्द हो रहा है।

24:04.068 --> 24:08.156
प्रजा तो डेविड और किसी भी
एक राजकुमारी की शादी को लेकर ख़ुश होगी।

24:08.239 --> 24:09.490
वह मैं क्यों नहीं हो सकती?

24:09.574 --> 24:12.910
जीत के बाद भी,
मेरी चौखट पर कई भेड़िए खड़े हैं।

24:13.744 --> 24:16.497
मुझे अपने साथ दैत्य संहारक चाहिए।

24:17.248 --> 24:19.000
वह मुझ पर ईश्वर के विश्वास का प्रतीक है।

24:19.083 --> 24:20.877
और मैं उसे ख़ुश रख सकती हूँ।

24:21.836 --> 24:24.380
यह उसे ख़ुश रखने के बारे में नहीं है।

24:25.047 --> 24:28.301
यह उसे ऐसा आदमी बनाने के बारे में है
जैसा कि मैं उसे बनाना चाहता हूँ।

24:28.968 --> 24:30.052
मेरे मर्ज़ी पर चलने वाला।

24:30.136 --> 24:31.596
-लेकिन पिताजी, मैं…
-मीखाल,

24:32.555 --> 24:35.766
मैं तुमसे बेइंतिहा मोहब्बत करता हूँ…

24:38.936 --> 24:40.229
पर तुम्हारी बहन ने सही कहा था।

24:40.813 --> 24:42.690
वही उसके लिए बेहतर साथी बनेगी।

24:45.151 --> 24:48.196
क्या मीराब ने आपसे ऐसा करने को कहा था?

24:48.279 --> 24:49.113
हाँ।

24:51.115 --> 24:53.159
इसी में हमारे राज्य की
सबसे ज़्यादा भलाई है।

24:55.161 --> 24:56.245
मीखाल?

25:02.585 --> 25:03.961
-मीराब?
-मीखाल?

25:06.839 --> 25:11.135
केवल मर्द ही अपनी तमन्ना पूरी करने के लिए
दूसरों को ज़रिया नहीं बनाते।

25:12.428 --> 25:14.180
जलने वाली बहनें भी ऐसा करती हैं।

25:29.320 --> 25:30.655
डैन और कितनी दूर है?

25:32.531 --> 25:35.117
क्या तुम्हें घुड़सवारी में
दिक्कत हो रही है, भाई?

25:36.410 --> 25:39.288
चाहो तो हम तुम्हारे लिए
खच्चर का इंतज़ाम कर सकते हैं।

25:40.373 --> 25:41.540
या पैदल भी चल सकते हो।

25:46.212 --> 25:49.090
तुम्हारे भाई को
अपनी ईर्ष्या छिपाना नहीं आता।

25:50.716 --> 25:52.301
मैंने नहीं चाहा था मैं उसका सेनापति बनूँ।

25:53.219 --> 25:55.054
बस इतना चाहता हूँ कि वह मुझे लायक़ समझे।

25:57.139 --> 25:59.600
अगर तुम उनसे कद्र माँगोगे
जो तुम्हें देने को तैयार नहीं हैं,

26:00.810 --> 26:02.478
तो उनसे ज़्यादा दोष तुम्हारा होगा।

26:07.233 --> 26:10.194
तुम्हें पता है कि डैन और कितना दूर है?

26:18.119 --> 26:20.121
इज़राइल के राजकुमारों को रास्ता दो,

26:20.871 --> 26:22.623
जोनाथन और एश्बाल।

26:23.666 --> 26:24.542
किस कारण से आए हैं?

26:25.042 --> 26:26.961
तुम्हारे साहब, डैन के याहिर से बात करने।

26:31.507 --> 26:32.842
वह दरबार में नहीं मिलेंगे।

26:33.718 --> 26:34.969
वह आगे के जंगलों में हैं।

26:53.612 --> 26:55.990
चाहे जो भी हो जाए, अपना आपा मत खोना।

26:56.115 --> 26:57.950
मैं अपना आपा कब खोता हूँ, मेरे राजकुमार?

27:03.039 --> 27:03.956
डैन के याहिर।

27:04.665 --> 27:07.001
मैंने सुना कि कुत्ता
फिर से खुला घूम रहा है।

27:07.752 --> 27:09.712
मेरे दर पर नाक रगड़ने आए हो?

27:09.795 --> 27:12.089
हम यहाँ आपके राजा के हुकुम पर आए हैं।

27:13.049 --> 27:16.635
वही राजा जिसकी पत्नी ने अपने बेटे को मेरे
घराने से किए पाप के लिए निष्कासित किया?

27:16.719 --> 27:18.095
उसके बावजूद वह यहाँ खड़ा है।

27:18.179 --> 27:19.055
हम बस बात करने आए हैं।

27:20.306 --> 27:21.307
हम बात नहीं करेंगे।

27:22.391 --> 27:24.643
-हम शिकार कर रहे हैं।
-किसका शिकार?

27:25.978 --> 27:26.812
जंगली सूअर का।

27:27.980 --> 27:29.148
सूअर अपवित्र होता है।

27:30.858 --> 27:32.068
धार्मिक नियम की बात कर रहे हो

27:32.151 --> 27:34.236
जबकि तुम्हारी बगल में
खड़े भाई ने वह तोड़ा था?

27:35.404 --> 27:36.655
बहरहाल, हम उसे खाते नहीं हैं।

27:37.531 --> 27:38.741
लेकिन फिलिस्तीनी खाते हैं।

27:39.658 --> 27:41.494
और वे उसके बदले में धातु देते हैं।

27:41.577 --> 27:42.411
भाई।

27:44.580 --> 27:46.457
मैं वह प्रस्ताव लाया हूँ
जिसकी आपने विनती की थी।

27:47.625 --> 27:50.628
हम दोनों घरानों के बीच शादी के रिश्ते की।

27:53.506 --> 27:54.757
नहीं।

27:54.840 --> 27:58.344
मुझे तुम्हारी शर्मिंदगी को
दूर करने में दिलचस्पी नहीं है।

27:59.261 --> 28:01.514
अपने राजकुमार से मुँह मोड़कर मत जाओ।

28:03.724 --> 28:05.559
शायद मैं दीनाह से बात कर सकता हूँ।

28:07.561 --> 28:08.813
उससे उसकी राय पूछ सकता हूँ।

28:08.896 --> 28:10.564
उसकी राय कब से मायने रखने लगी?

28:11.941 --> 28:14.944
तुम लोग बेवजह ही
इतने मीलों की दूरी तय करके आए हो।

28:15.027 --> 28:16.904
बेहतर होगा कि लौट जाओ।

28:22.451 --> 28:25.037
क्या तुम ही हो
जिसे सब दैत्य हत्यारा कहते हैं?

28:26.247 --> 28:27.915
असल में, इसे दैत्य संहारक कहते हैं।

28:28.666 --> 28:31.335
हाँ। मैं डेविड हूँ।

28:31.419 --> 28:34.880
क्या तुम तलवार भी उतनी फुर्ती से
चला लेते हो जितनी कि एक गुलेल?

28:36.090 --> 28:37.383
यह पता लगाने का बस एक तरीका है।

28:38.968 --> 28:39.802
मेरे साथ चलो।

28:40.553 --> 28:42.430
एक अपवित्र जानवर का शिकार नहीं करूँगा।

28:44.140 --> 28:44.974
बहुत ख़ूब।

28:46.183 --> 28:47.601
लेकिन चल तो लेते हो, है न?

28:51.814 --> 28:52.648
आओ।

28:53.274 --> 28:54.358
शिकार करते हैं!

28:59.447 --> 29:00.489
ख़ामोश हो जाओ।

29:01.282 --> 29:03.325
जंगली सूअर चालाक जानवर होते हैं,

29:04.827 --> 29:06.287
पकड़े जाने पर ख़तरनाक भी।

29:07.496 --> 29:08.456
बिल्कुल महाराज की तरह।

29:47.912 --> 29:49.747
मारा गया, मेरी तलवार की धार से।

29:52.958 --> 29:56.670
दीनाह, कुछ शाही मेहमान आए हैं।

29:58.297 --> 30:00.799
शादी के लिए तुम्हारा कोमल हाथ माँगने।

30:05.387 --> 30:06.514
तुम्हें मैं याद नहीं हूँ?

30:11.185 --> 30:12.937
राजा ने बहुत बड़ी जीत हासिल की है।

30:13.437 --> 30:15.814
ज़रूरत के इस वक़्त में
जो नेता उनका साथ नहीं देंगे,

30:15.898 --> 30:16.899
वे नतीजा भुगतेंगे।

30:19.109 --> 30:20.569
क्या तुम मुझे धमकी दे रहे हो?

30:22.738 --> 30:24.365
हम आपको एक अवसर दे रहे हैं।

30:24.448 --> 30:28.035
एश्बाल और दीनाह की शादी
दोनों पक्षों के लिए फ़ायदेमंद साबित होगी।

30:31.288 --> 30:33.916
युद्ध के बाद, राजा पर बहुत कर्ज़ होता है।

30:34.500 --> 30:37.419
उसे चुकाने के लिए राज्य के सबसे अमीर
नेता का सहारा लेने से बेहतर क्या है?

30:39.046 --> 30:40.506
और फिर भी, तुम्हारी माँ ने…

30:43.384 --> 30:44.385
मेरा अपमान किया।

30:44.468 --> 30:45.886
उस ग़लती का उन्हें पछतावा है।

30:45.970 --> 30:46.845
मेरा यकीन मानिए।

30:50.307 --> 30:52.309
तुम्हारा क्या, दैत्य संहारक?

30:53.018 --> 30:54.728
तुम मुझे क्या समझदारी भरा सुझाव दोगे?

31:00.693 --> 31:02.361
आपने अपमान का ज़िक्र किया था।

31:03.696 --> 31:05.114
मैं उस एहसास को बख़ूबी जानता हूँ।

31:06.699 --> 31:12.162
पूरी ज़िंदगी, न जाने कितने लोग
मुझे कमतर साबित पर तुले रहे।

31:12.913 --> 31:14.790
पर मैंने उनके शब्दों से आहत होने के बजाय

31:15.291 --> 31:16.750
अपना मन कड़ा कर लिया।

31:18.252 --> 31:19.211
ताकि उनसे ऊपर उठ सकूँ।

31:23.507 --> 31:24.550
बहुत ख़ूब कहा।

31:26.218 --> 31:29.388
आप महाराज का प्रस्ताव ठुकराकर
कुछ नहीं हासिल कर सकते हैं।

31:31.724 --> 31:34.560
या फिर ताक़त दिखाकर देख करते हैं
कि आपका क्या फ़ायदा होगा।

31:38.230 --> 31:39.982
यकीनन, मुनाफ़ा कई घावों को भर देता है।

31:45.321 --> 31:47.197
एक सच्चे व्यापारी की तरह बोले।

31:48.365 --> 31:49.199
सावधान रहना।

31:50.492 --> 31:53.370
इसे अभी तक एहसास नहीं हुआ है
कि यह कितना पक्का नेता है।

32:13.515 --> 32:14.975
तलवारबाज़ी में काफ़ी कुशल हो।

32:18.687 --> 32:19.813
एक औरत की तुलना में?

32:20.397 --> 32:21.231
किसी की भी तुलना में।

32:22.900 --> 32:24.526
तुम जश्न में शामिल नहीं हो रहीं?

32:26.070 --> 32:27.446
आख़िर शिकार को तुमने मारा था।

32:28.030 --> 32:30.032
मेरे पिता कुछ और ही कहते हैं।

32:37.498 --> 32:38.624
मुझे माफ़ कर दो, दीनाह…

32:41.794 --> 32:43.629
तुम्हें मेरी वजह से शर्मिंदगी झेलनी पड़ी।

32:46.757 --> 32:47.925
सोच-समझकर बोलना, एश्बाल।

32:50.386 --> 32:52.262
मैं आज पहले ही एक सूअर मार चुकी हूँ।

32:56.266 --> 32:58.727
मैंने ख़बरें सुनी हैं
कि तुम्हारे पिता तुमसे कैसे पेश आते हैं।

33:00.771 --> 33:02.314
वह एक बेटा चाहते थे।

33:04.233 --> 33:07.486
मैं उन नाकामियों की जीती-जागती मिसाल हूँ।

33:08.487 --> 33:09.655
हम दोनों एक नाव में सवार हैं।

33:12.991 --> 33:14.702
शायद, एक साथ मिलकर हम यह बदल सकें।

33:15.953 --> 33:18.789
मैं तुमसे इसलिए शादी नहीं करूँगी
ताकि तुम मूसा के नियम से बच सको।

33:18.872 --> 33:20.499
यह हम दोनों के बचकर निकलना का रास्ता है।

33:22.167 --> 33:24.628
तुम मुझे पसंद नहीं करतीं,
उसमें कोई हर्ज़ नहीं है।

33:25.170 --> 33:27.548
पर ऐसा ज़रूरी नहीं
कि केवल प्यार के लिए शादी की जाए।

33:29.717 --> 33:31.969
मेरे कान में चुपके से
अपनी बात कहो, मेरे राजकुमार।

33:32.636 --> 33:33.470
दीनाह।

33:34.054 --> 33:34.888
दीनाह,

33:35.973 --> 33:39.476
मैं तुम्हें इस जगह से
छुटकारा पाने का मौका दे रहा हूँ।

33:41.061 --> 33:41.895
इसे मंज़ूर कर लो।

33:51.905 --> 33:53.449
मैं तुम्हें वारिस नहीं देने वाली।

33:54.408 --> 33:56.034
और मुझे एक ताकतवर घोड़ा चाहिए,

33:56.618 --> 33:59.329
राजा की अनुमति के साथ
कि मैं जितना चाहे शिकार पर जा सकती हूँ।

33:59.413 --> 34:00.748
मेरी ये दो शर्तें हैं।

34:03.125 --> 34:03.959
बेशक।

34:12.259 --> 34:13.177
और एश्बाल,

34:15.387 --> 34:17.014
मैं प्यार का नाटक नहीं करूँगी।

34:19.308 --> 34:20.476
अब मेरे अंदर प्यार नहीं बचा।

34:37.701 --> 34:38.535
आबनर?

34:43.874 --> 34:45.042
क्या अब यह नौबत आ गई है?

34:47.503 --> 34:48.712
काश कोई और रास्ता होता।

34:50.047 --> 34:51.882
तो तुम बस राजा के खूनी दलाल हो।

34:53.550 --> 34:56.720
उनके बिना वजह के गुस्से का ज़रिया।

34:58.055 --> 34:59.014
मैंने शपथ ली थी।

35:00.140 --> 35:01.433
हमारा खून का रिश्ता है, आबनर।

35:02.684 --> 35:04.228
वह शपथ से ज़्यादा मायने रखता है।

35:06.772 --> 35:08.023
तुम कितने भले हुआ करते थे।

35:09.483 --> 35:12.569
ये मत करो, आबनर।

35:16.031 --> 35:17.366
यहाँ से चली जाओ।

35:17.950 --> 35:19.117
इज़राइल से दूर चली जाओ!

35:19.701 --> 35:23.038
किसी से एक शब्द भी मत कहना,
वरना ढूँढ़कर तुम्हारी जान ले लूँगा।

35:23.747 --> 35:24.581
जाओ!

35:26.792 --> 35:27.709
अलविदा, आबनर।

36:16.383 --> 36:17.217
और शराब लाओ।

36:42.409 --> 36:46.079
लगता है तुम्हारे लिए कुछ नहीं बचा, बहन।

37:06.391 --> 37:08.310
छोड़ो… मैं करती हूँ। शुक्रिया।

37:13.190 --> 37:14.566
तुम्हारे पिता कहाँ हैं?

37:15.233 --> 37:16.068
मुझे नहीं पता।

37:27.120 --> 37:30.123
काश मैं तुम्हारे लिए हालात आसान बना पाती।

37:30.207 --> 37:31.041
लेकिन…

37:33.919 --> 37:35.462
हम सबकी अपनी जिम्मेदारियां हैं।

37:36.171 --> 37:37.047
रहने दीजिए, माँ।

37:37.130 --> 37:40.467
मैं नहीं चाहती कि अब एक और इंसान भी
मुझसे यह भूल जाने के लिए कहे।

37:40.550 --> 37:42.636
बात सिर्फ़ इतनी सी नहीं है।

37:43.470 --> 37:45.138
तुमने जंग से पहले अपने पिता को देखा था।

37:45.722 --> 37:47.099
उनकी क्या हालत हो गई थी।

37:48.725 --> 37:51.228
और उनकी उस यातना में आपका हाथ भी था।

37:51.979 --> 37:53.563
जादू-टोना और जंतर-मंतर।

37:53.647 --> 37:54.690
ख़ामोश।

37:55.691 --> 37:57.025
ये सब ग़ैरकानूनी भी हैं।

37:57.109 --> 37:59.236
पर आपको वह बदलना सही लगा, है न?

38:01.113 --> 38:02.280
तुमने यह कहाँ से सुना?

38:02.364 --> 38:04.032
अहिमेलैक। वह…

38:05.409 --> 38:06.243
हमें अकेला छोड़ दो!

38:12.124 --> 38:16.169
तुम फिर कभी किसी से
इसका ज़िक्र नहीं करोगी।

38:17.212 --> 38:18.588
मैं जानती हूँ आपने क्या किया, माँ।

38:19.381 --> 38:23.093
और बेचारे अहिमेलैक को
आपके पाप का हिसाब देना पड़ा।

38:26.096 --> 38:29.349
एक दिन, तुम सीखोगी कि कैसा महसूस होता है

38:30.517 --> 38:35.272
जब अपनों को बचाने के लिए
बुरे फ़ैसले लेने पड़ते हैं।

38:37.315 --> 38:38.734
तुम्हें इस परिवार की परवाह है?

38:42.070 --> 38:43.113
बेशक, परवाह है।

38:44.948 --> 38:47.951
तो फिर तुम अपने पिता के
फ़ैसले की इज़्ज़त करोगी…

38:50.454 --> 38:51.455
और यह सब भूल जाओगी।

38:55.375 --> 38:56.209
ठीक है।

39:11.725 --> 39:13.393
तुमने बात अच्छे से संभाली, डेविड।

39:14.811 --> 39:16.980
अगर तुम न होते
तो याहिर हमें वापस भेज देता।

39:17.064 --> 39:18.774
-मैंने उससे बस सच बोला था।
-नहीं।

39:19.608 --> 39:23.320
नहीं, तुमने उसे एक विकल्प दिया।
तुमने बीच का रास्ता ढूँढ़ा।

39:23.403 --> 39:27.324
शायद मैंने यह अपनी माँ से सीखा था।
वह बहुत धीरज वाली महिला थीं।

39:27.407 --> 39:30.077
हो सकता है, पर तुममें जो है
वह सिखाया नहीं जा सकता।

39:31.953 --> 39:32.788
आस्था।

39:34.414 --> 39:38.085
पता है, सैनिक बिना अपने सेनापति की
इज़्ज़त किए उनके आदेश का पालन कर सकते हैं।

39:39.127 --> 39:40.295
लेकिन अगर तुम उन्हें मना सको

39:40.378 --> 39:43.632
कि तुम उनके लिए भी उतनी ही ख़ुशी-ख़ुशी
जान दे दोगे जितनी कि अपने लिए,

39:45.342 --> 39:47.552
तो वे सैनिक तुम्हारे पीछे-पीछे
नर्क भी जा सकते हैं।

40:06.321 --> 40:08.406
मुझे तो लगा
कि नाश्ते के लिए बुलाया गया है,

40:09.032 --> 40:10.450
बस हम दोनों।

40:10.951 --> 40:13.203
हमने तय नही किया था
कि अब और राज़ नहीं रखेंगे?

40:14.579 --> 40:18.750
फिर भी, जब मैं यातना सह रहा था तो तुमने
मेरी उँगली से मेरी मुहरबंद अँगूठी निकाली।

40:18.834 --> 40:21.378
मेरी सहमति के बिना मेरा क़ानून बदल दिया।

40:27.884 --> 40:29.928
मेरे पास और कोई चारा नहीं था।

40:30.011 --> 40:31.930
मैं तुम्हारी रक्षा कर रही थी।

40:32.514 --> 40:34.141
मैंने तुमसे झूठ बोलने से मना किया था।

40:34.975 --> 40:36.726
फिर भी, हम आज यहाँ हैं।

40:38.103 --> 40:41.565
तुम मूर्ख थीं जो यह सोचा कि कोई
मेरे सामने इस सच का खुलासा नहीं करेगा।

40:46.945 --> 40:49.948
आख़िरकार तुम वह बिच्छू निकलीं।

40:54.286 --> 40:55.203
सॉल …

41:00.667 --> 41:02.002
मुझसे ग़लती हो गई थी।

41:03.086 --> 41:04.045
मुझे बहुत पछतावा है।

41:04.880 --> 41:08.008
तुम मेरे और हमारे परिवार के साथ
टैबनैकल नहीं चलोगी।

41:09.050 --> 41:15.098
उसके बदले में, तुम महल में रहकर
यह सोचोगी कि आगे कैसे जीना चाहती हो।

41:17.350 --> 41:19.603
मैंने जितने ख़तरों का सामना किया है…

41:21.354 --> 41:23.106
कभी नहीं सोचा था कि तुम उनमें से एक होगी।

41:29.029 --> 41:30.197
-सॉल?
-चली जाओ!

41:31.781 --> 41:32.699
इसी वक़्त!

41:36.578 --> 41:37.454
केज़िया…

41:40.207 --> 41:41.333
तुम रुको।

42:23.959 --> 42:24.793
क्या बात है?

42:25.627 --> 42:27.504
संतरी वहाँ पर पहरा क्यों नहीं दे रहे हैं?

42:58.118 --> 42:59.953
हथियार उठाओ!

43:28.106 --> 43:29.357
अबी! इसे पकड़कर रखो!

43:56.551 --> 43:57.385
जोनाथन!

43:58.053 --> 43:59.054
उसे नीचे उतारो!

44:00.764 --> 44:01.765
उसे नीचे उतारो!

46:27.035 --> 46:28.036
कुछ गड़बड़ हुई है।

46:28.119 --> 46:31.122
राजकुमारी, मेरा नाम सारा है।
मैं एक वैद्य हूँ। मैं मदद कर सकती हूँ।

46:37.837 --> 46:39.464
मीखाल, मेरी मदद करो।

46:41.341 --> 46:42.300
अच्छा।

46:44.260 --> 46:45.303
सारा।

46:47.096 --> 46:48.139
क्या तुम्हें चोट लगी है?

46:48.723 --> 46:49.599
इस बार नहीं।

46:50.642 --> 46:51.476
तो हमारी मदद करो।

46:52.352 --> 46:53.186
आओ।

46:55.396 --> 46:58.274
शाही कारवाँ पर हमला करने की
हिमाकत कौन कर सकता है?

46:58.358 --> 46:59.609
वे फिलिस्तीनी नहीं थे।

47:00.109 --> 47:01.903
बर्बर हत्यारों की टोली लगते हैं।

47:02.487 --> 47:03.488
किस इरादे से ऐसा किया?

47:03.571 --> 47:04.739
एक राजकुमार को मारने के लिए?

47:05.323 --> 47:07.367
राज्य के सबसे अमीर
ज़मींदार को लूटने के लिए?

47:07.450 --> 47:10.703
उन्हें जो भी चाहिए था,
याहिर की मौत हो चुकी है।

47:11.579 --> 47:13.581
और उसके साथ तुम्हें दोष देने वाला
मर गया, एश्बाल।

47:14.624 --> 47:15.833
मुझे जवाब चाहिए, आबनर।

47:16.376 --> 47:19.629
वरना, याहिर के समर्थकों को संदेह होगा
कि इस हादसे में मेरा कोई हाथ था।

47:20.755 --> 47:22.215
-जाओ।
-जी, जनाब।

47:26.928 --> 47:28.221
महाराज, आपसे बात कर सकता हूँ?

47:28.304 --> 47:31.724
फिर से मीखाल से शादी करने की बात मत कहना।

47:31.808 --> 47:33.768
नहीं, महाराज,
मैं कोई और प्रार्थना लेकर आया हूँ।

47:35.395 --> 47:37.355
मेरा संबंध आपके परिवार से जुड़ने से पहले,

47:38.690 --> 47:40.191
मुझे आपसे थोड़े वक़्त की मोहलत चाहिए।

47:41.693 --> 47:45.321
किसी भी अच्छे बेटे की तरह, मैं चाहता हूँ
कि मेरे पिता हमें आशीर्वाद देने आएँ।

47:46.322 --> 47:49.492
लेकिन वह और मेरा पूरा परिवार अब भी
मेरे भाई नेथानील की मौत के शोक में हैं।

47:50.118 --> 47:51.953
उसे बहुत सम्मान के साथ याद किया जाएगा।

47:55.373 --> 47:56.207
इससे भी बढ़कर,

47:57.000 --> 47:59.127
मीखाल और मीराब के मन में इस शादी को लेकर

47:59.210 --> 48:00.503
अलग-अलग धारणाएँ हैं

48:00.587 --> 48:03.590
और उन्हें आपके निर्णय के विवेक को
समझने के लिए थोड़ा वक़्त मिलना चाहिए।

48:06.175 --> 48:08.428
और मुझे भी एक सेनापति

48:09.596 --> 48:12.890
और आपके घराने के लायक़ एक राजकुमार
बनने के लिए समय मिलना चाहिए।

48:14.976 --> 48:16.603
तुम्हारा जादू याहिर पर चल गया होगा।

48:17.395 --> 48:18.688
पर मुझे मनाना इतना आसान नहीं है।

48:20.315 --> 48:21.816
तो इसे एक समझौता मान लीजिए।

48:22.358 --> 48:23.443
एक बीच का रास्ता।

48:25.236 --> 48:27.488
मैं आपसे न्याय और करुणा मांग रहा हूँ।

48:28.656 --> 48:30.116
और हमारे महान राजा के पास दोनों हैं।

48:32.619 --> 48:33.494
बहुत ख़ूब।

48:36.080 --> 48:39.459
सबकी सहूलियत की ख़ातिर,
हम शादी कुछ समय के लिए टाल देंगे।

48:41.586 --> 48:44.130
शुक्रिया, महाराज।

48:46.799 --> 48:47.884
लेकिन यह बात जान लो…

48:50.219 --> 48:52.013
तुम्हें अब भी बहुत कुछ सीखना है।

49:01.356 --> 49:02.440
यह मेरी माँ की है।

49:02.523 --> 49:05.610
तो… किसी को बताना मत।

49:08.029 --> 49:08.905
बहुत ख़ूब।

49:18.956 --> 49:20.041
तुम लोग बात कर लो।

49:22.001 --> 49:22.835
शुक्रिया।

49:23.836 --> 49:24.671
दीनाह।

49:28.299 --> 49:29.133
बैठो।

49:36.307 --> 49:38.893
मुझे बहुत अफ़सोस है कि हम
तुम्हारे पिता की रक्षा नहीं कर पाए।

49:39.977 --> 49:42.063
पर उनकी मौत के बाद,

49:43.564 --> 49:45.316
तुम्हारा घर लौटना ख़तरे से खाली नहीं होगा।

49:46.442 --> 49:48.444
एक बेटे के बिना,
तुम्हारे कबीले के दूसरे मुखिया

49:48.528 --> 49:49.779
सत्ता पर अपना हक़ जमाएँगे।

49:49.862 --> 49:51.322
उनमें से एक भी लायक़ नहीं है।

49:51.906 --> 49:53.282
और तुम आसानी से शिकार बन जाओगी।

49:53.366 --> 49:55.118
इतनी आसानी से नहीं, और वे यह जानते हैं।

49:56.369 --> 50:00.998
दीनाह, हम दोनों जानते हैं कि एक दैत्य भी
एक कम ताक़तवर लड़के के हाथों मारा गया।

50:01.791 --> 50:02.875
तुम्हें यहीं पर रहना चाहिए।

50:03.626 --> 50:07.547
राजा जल्द ही मेहमाननवाज़ी से ऊब जाएँगे।
उनका मेरे प्रति कोई कर्तव्य नहीं है।

50:08.715 --> 50:10.758
एक मरे हुए ज़मींदार की बेटी के प्रति नहीं।

50:11.342 --> 50:12.593
पर एक राजकुमार की पत्नी के…

50:13.511 --> 50:15.930
मुझे तुम्हारे रहमोकरम की
ज़रूरत नहीं है, एश्बाल।

50:16.848 --> 50:17.682
नहीं,

50:18.725 --> 50:20.184
सिर्फ़ इतनी सी बात नहीं है। मुझे…

50:23.062 --> 50:24.105
मुझे तुम बहुत…

50:29.652 --> 50:30.486
अच्छी लगती हो।

50:42.707 --> 50:43.541
पता है…

50:46.127 --> 50:47.920
उस रात तुमने मेरे साथ
नापाक हरकत नहीं की थी।

50:50.631 --> 50:51.466
तुम नशे में थे।

50:52.425 --> 50:53.426
बहुत उत्तेजित थे।

50:54.886 --> 50:56.554
लेकिन तुम मेरे बगल में सो गए थे।

50:59.140 --> 51:02.310
पर तुम्हारे पिता ने तो यही दावा किया था।

51:02.393 --> 51:05.438
हाँ, क्योंकि उनका मानना था कि ऐसा हुआ,

51:06.397 --> 51:08.107
हालाँकि मैंने कई बार मना किया।

51:09.692 --> 51:14.030
तुमने उन्हें मुझसे पल्ला झाड़ने और
राजा को धमकाने का मौका दे दिया।

51:17.033 --> 51:17.867
एश्बाल…

51:19.786 --> 51:20.995
तुम मेरे दोषी नहीं हो।

51:26.375 --> 51:27.210
रुक जाओ।

51:30.880 --> 51:32.340
हमें ख़ुद की ख़ातिर

51:33.966 --> 51:36.052
हमारे पिताओं की उम्मीद से ऊपर उठना चाहिए।

51:36.636 --> 51:38.638
एक साथ मिलकर हम दूसरा मौका पा सकते हैं।

51:39.680 --> 51:40.681
हम कल शादी करेंगे।

51:41.682 --> 51:43.059
ऐसे हालात में,

51:44.477 --> 51:45.770
रस्म-रिवाज़ की ज़रूरत नहीं है।

51:46.729 --> 51:48.064
मैं तुम्हें यही दे सकता हूँ।

51:58.032 --> 51:59.158
क्या मैं पट्टी कर सकती हूँ?

52:01.577 --> 52:03.454
अभी इसे उबाला है। यह ज़्यादा साफ़ है।

52:12.463 --> 52:14.006
घाव अच्छे से भर रहा है।

52:14.090 --> 52:16.217
एक बेहद कुशल वैद्य ने इसका इलाज किया था।

52:17.468 --> 52:18.302
मुझे बताओ।

52:20.346 --> 52:22.682
समझदार, फिर भी निडर।

52:24.308 --> 52:26.727
शायद अभी लोग उसकी असली कीमत नहीं समझते।

52:32.024 --> 52:33.067
ख़ूबसूरत।

52:36.696 --> 52:39.240
-मैं इस वैद्य से मिलना चाहूँगी।
-तुम्हें मिलना चाहिए।

52:43.202 --> 52:44.370
आने का फ़ैसला कैसे किया?

52:46.163 --> 52:50.501
तुम्हारे भाई ने तुम्हारी तरफ़ से
कई संदेश और तोहफ़े भेजे थे।

52:50.585 --> 52:52.253
सच में, वह अड़ा हुआ था।

52:53.796 --> 52:55.131
लेकिन सच कहूँ तो,

52:56.424 --> 52:59.135
मैं बार-बार सोच रही थी
कि क्या तुम ठीक हुए होगे या नहीं।

53:00.595 --> 53:02.555
तो, मैंने सोचा कि ख़ुद ही आकर देख लूँ।

53:04.765 --> 53:05.600
उठो।

53:16.652 --> 53:17.570
लगता है तुम ठीक हो गए।

53:23.534 --> 53:24.410
लगभग।

53:26.078 --> 53:26.954
पूरी तरह से नहीं।

53:28.789 --> 53:30.625
उसमें अभी बहुत समय लगेगा।

53:35.588 --> 53:36.881
मेरे घाव बहुत धीरे-धीरे भरते हैं।

53:39.008 --> 53:40.468
और मुझे लगातार देखभाल चाहिए।

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बेरहम योद्धा।

54:11.999 --> 54:13.501
मैं यहाँ राजा से मिलने आया हूँ।

54:14.335 --> 54:17.088
और तुम्हें राजा से क्या काम है?

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मैं उनकी रहमत के बदले में
जानकारी देने आया हूँ।

54:20.591 --> 54:21.801
अब, रास्ते से हट जाओ।

54:24.220 --> 54:29.934
तुमने जंग के मैदान में
बग़ावत करने की कोशिश की थी। गद्दार।

54:30.810 --> 54:34.897
तुम राजा से जो भी कहना चाहते हो,
पहले मुझसे कहो।

54:45.491 --> 54:46.325
महाराज।

54:47.326 --> 54:49.996
एड्रियल ज़रूरी ख़बर लेकर आया है।

54:50.079 --> 54:52.164
महाराज, रहम कीजिए।

54:53.124 --> 54:57.461
मैं आपके पैरों पर गिरकर
आपसे दया की भीख माँग रहा हूँ।

55:00.297 --> 55:01.173
महाराज।

55:18.399 --> 55:20.234
नहीं, रहम कीजिए।

55:22.403 --> 55:25.239
तुम जानते हो
कि गद्दारों को क्या सज़ा दी जाती है।

55:25.322 --> 55:28.034
पर अगर मेरे पास ऐसी जानकारी हो
जो मेरी वफ़ादारी को साबित कर दे?

55:28.617 --> 55:29.952
कैसी जानकारी?

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मैंने सैमुअल को बेथलेहेम में देखा था।

55:33.998 --> 55:36.208
मुझे पता है कि वह किसके घर गया था।

55:40.087 --> 55:40.921
महाराज,

55:42.798 --> 55:45.009
मुझे पता है कि उन्होंने किसे चुना है।

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संवाद अनुवादक श्रुति शुक्ला

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रचनात्मक पर्यवेक्षक
दिनेश शाकुल
है।
